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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Mon, 08/23/2021 - 11:39
Source:
डब्ल्यूआरआई इंडिया
पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है खाने की बर्बादी
प्रदूषित तत्वों से फैले प्रदूषण में  8 प्रतिशत  खाने की बर्बादी की वजह से होता है । भारत में बर्बाद हुए खाने से सामजिक, पर्यावरणीय और  आर्थिक प्रभावों और मौजूदा स्थितियों को समझने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट इंडिया ( WRI India)  द्वारा 106 प्रकाशित और अप्रकाशित  दस्तावेजों को नियमित रूप से विश्लेषण  करने  के साथ-साथ विशेषज्ञों की राय भी ली। इस अध्ययन में फूड एंड लैंड कॉल कोलिशन (FOLU)  इंडिया ने  भी सहयोग बखूबी सहयोग दिया। इस अध्ययन में रिसर्च, पॉलिसी और प्रशिक्षण में जो भी खामियां थी उसे व्यवस्थित रूप से बताया गया है ताकि भारत में खाने की बर्बादी को रोका जा सके। फूड लॉस एंड वेस्ट इन इंडिया: द नोन्स एंड द अननोन्स पर डब्ल्यू आर आई का  नया अध्ययन देश में खराब खाने की समस्या से निपटने के लिए एक ऐसा रोडमैप  तैयार कर रहा है  जिससे इसके महत्व, हॉटस्पॉट और महत्वपूर्ण नुकसान की पहचान की जा सके।
Submitted by Shivendra on Fri, 08/20/2021 - 10:36
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पानी की टैंकर से पानी भरते हुए ग्रामीण
बुंदेलखंड हमेशा पानी की किल्लत  को लेकर चर्चा में रहता है. यहां के कई गांव ऐसे हैं, जहां आज भी लोग बूंद-बूंद के लिए जद्दोजहद करते नजर आए हैं. इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जिसकी हर जगह चर्चा है. एक युवक ने जब आदिवासियों को घाटी से चढ़कर दो किलोमीटर दूर से पानी लाते देखा तो उसका दिल पसीज गया. उसने इस समस्या को खत्म करने की ठानी और बीते चार साल से वो उन आदिवासियों को हर हाल में पानी उपलब्ध करा रहा है. ये मामला दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के गीदन गांव का है. पिछले चार साल से हर दिन शाहजादपुरा निवासी नरेंद्र कटारे उस गांव में पानी का टैंकर लेकर पहुंचा रहा है, जहां प्रशासन हार मान चुका है. गौर करने वाली बात ये है कि पानी के परिवहन पर युवक अब तक 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका है. गीदन में पानी की विकराल समस्या है. जलस्तर हजार फीट से भी ज्यादा नीचे है और गांव में एक भी कुआं नहीं है, कुछ बोर किए गए थे, लेकिन उनमें पानी नहीं निकला. गांव में एक हैंडपंप चालू है, जो पूरे दिन में बमुश्किल 30 लीटर ही पानी दे पाता है  
Submitted by Shivendra on Thu, 08/19/2021 - 13:19
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जनमंच
कई सरकारी स्कूलों में पीने का पानी और शौचालय नहीं
शिक्षाविदों का मानना है उत्तराखंड का एक पहाड़ी राज्य के चलते दूसरे सभी राज्यों से  बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के शिक्षा विभाग के एक अधिकारी कहते है उत्तराखंड के  स्कूल कई मानकों में दूसरे राज्यों के स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन किया है। और इस स्थिति को जारी रखते हुए  शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और बेहतर करने के लिये लगातार काम करे रहे । वही नीति आयोग की रिपोर्ट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में उत्तराखंड टॉप 5 राज्य में शामिल है। उत्तराखंड, केरल, हिमाचल, गोवा के बाद चौथे स्थान पर काबिज है  । केरल 100 में से 80 अंक पाकर पहले स्थान पर  है जबकि 74 अंकों के साथ हिमाचल दूसरे और 71 अंकों के साथ गोवा तीसरे और 70 अंको के साथ उत्तराखंड चौथे स्थान पर है। 

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है खाने की बर्बादी जानिए कैसे निपटें इससे

Submitted by Shivendra on Mon, 08/23/2021 - 11:39
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डब्ल्यूआरआई इंडिया
पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है खाने की बर्बादी
प्रदूषित तत्वों से फैले प्रदूषण में  8 प्रतिशत  खाने की बर्बादी की वजह से होता है । भारत में बर्बाद हुए खाने से सामजिक, पर्यावरणीय और  आर्थिक प्रभावों और मौजूदा स्थितियों को समझने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट इंडिया ( WRI India)  द्वारा 106 प्रकाशित और अप्रकाशित  दस्तावेजों को नियमित रूप से विश्लेषण  करने  के साथ-साथ विशेषज्ञों की राय भी ली। इस अध्ययन में फूड एंड लैंड कॉल कोलिशन (FOLU)  इंडिया ने  भी सहयोग बखूबी सहयोग दिया। इस अध्ययन में रिसर्च, पॉलिसी और प्रशिक्षण में जो भी खामियां थी उसे व्यवस्थित रूप से बताया गया है ताकि भारत में खाने की बर्बादी को रोका जा सके। फूड लॉस एंड वेस्ट इन इंडिया: द नोन्स एंड द अननोन्स पर डब्ल्यू आर आई का  नया अध्ययन देश में खराब खाने की समस्या से निपटने के लिए एक ऐसा रोडमैप  तैयार कर रहा है  जिससे इसके महत्व, हॉटस्पॉट और महत्वपूर्ण नुकसान की पहचान की जा सके।

एक युवक के प्रयास से घर-घर तक पहुँच रहा है पानी

Submitted by Shivendra on Fri, 08/20/2021 - 10:36
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पानी की टैंकर से पानी भरते हुए ग्रामीण
बुंदेलखंड हमेशा पानी की किल्लत  को लेकर चर्चा में रहता है. यहां के कई गांव ऐसे हैं, जहां आज भी लोग बूंद-बूंद के लिए जद्दोजहद करते नजर आए हैं. इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जिसकी हर जगह चर्चा है. एक युवक ने जब आदिवासियों को घाटी से चढ़कर दो किलोमीटर दूर से पानी लाते देखा तो उसका दिल पसीज गया. उसने इस समस्या को खत्म करने की ठानी और बीते चार साल से वो उन आदिवासियों को हर हाल में पानी उपलब्ध करा रहा है. ये मामला दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के गीदन गांव का है. पिछले चार साल से हर दिन शाहजादपुरा निवासी नरेंद्र कटारे उस गांव में पानी का टैंकर लेकर पहुंचा रहा है, जहां प्रशासन हार मान चुका है. गौर करने वाली बात ये है कि पानी के परिवहन पर युवक अब तक 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका है. गीदन में पानी की विकराल समस्या है. जलस्तर हजार फीट से भी ज्यादा नीचे है और गांव में एक भी कुआं नहीं है, कुछ बोर किए गए थे, लेकिन उनमें पानी नहीं निकला. गांव में एक हैंडपंप चालू है, जो पूरे दिन में बमुश्किल 30 लीटर ही पानी दे पाता है  

कई सरकारी स्कूलों में पीने का पानी और शौचालय नहीं जानिए क्या है कारण 

Submitted by Shivendra on Thu, 08/19/2021 - 13:19
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जनमंच
कई सरकारी स्कूलों में पीने का पानी और शौचालय नहीं
शिक्षाविदों का मानना है उत्तराखंड का एक पहाड़ी राज्य के चलते दूसरे सभी राज्यों से  बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के शिक्षा विभाग के एक अधिकारी कहते है उत्तराखंड के  स्कूल कई मानकों में दूसरे राज्यों के स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन किया है। और इस स्थिति को जारी रखते हुए  शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और बेहतर करने के लिये लगातार काम करे रहे । वही नीति आयोग की रिपोर्ट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में उत्तराखंड टॉप 5 राज्य में शामिल है। उत्तराखंड, केरल, हिमाचल, गोवा के बाद चौथे स्थान पर काबिज है  । केरल 100 में से 80 अंक पाकर पहले स्थान पर  है जबकि 74 अंकों के साथ हिमाचल दूसरे और 71 अंकों के साथ गोवा तीसरे और 70 अंको के साथ उत्तराखंड चौथे स्थान पर है। 

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
ganvon-ko-jagata-ek-shikshak
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6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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