Latest

Popular Articles

Upcoming Event

खासम-खास

केरल की चेतावनी - सम्भावित कारण

Submitted by editorial on Sat, 09/15/2018 - 15:16
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
इडुक्की में सूखी पेरियार नदीइडुक्की में सूखी पेरियार नदी (फोटो साभार - फर्स्टपोस्ट)भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबार भास्कर (13 सितम्बर, 2018) में ‘केरल की नई मुसीबत’ के शीर्षक से खबर छपी है। इस खबर के अनुसार जहाँ बाढ़ ने तबाही मचाई थी वहाँ नदियाँ और कुएँ सूखे। अखबार आगे लिखता है कि पिछले माह की 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से गुजरे केरल में अब सूखे का संकट मँडरा रहा है। मात्र तीन सप्ताह के अन्दर बाढ़ग्रस्त इलाकों की नदियों और कुओं का जलस्तर गिरना प्रारम्भ हो चुका है।

Content

उत्तर का “टांका” दक्षिण में

Submitted by editorial on Fri, 07/27/2018 - 18:43
Author
श्रीपद्रे
Source
द वाटर कैचर्स, 2017
थुम्बे बाँध की वजह से नेत्रावती नदी का पानी खारा हो गयाउत्तर भारत के राजस्थान और गुजरात में टांका बहुत प्रचलित और प्राचीन नाम है। टांका भूजल संरक्षण का एक साधन है। लेकिन दक्षिण के किसी राज्य में टांका दिख जाये तो क्या आश्चर्य नहीं होगा? टांका अगर उस राज्य में दिखे जहाँ औसत 4000 मिलीलीटर सालाना वर्षा होती है तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है। जब यह किसी पुराने गिरजाघर में दिख जाये तो उसके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ जाना लाजमी है। यह समझने की जरूरत बढ़ जाती है कि आखिर किसने और क्यों यहाँ टांका बनाया होगा?

जहाँ चाह वहाँ राह

Submitted by editorial on Fri, 07/27/2018 - 18:30
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
सौर ऊर्जादिल्ली सरकार ने, हाल ही में, किसानों की आय में तीन से पाँच गुना तक इजाफा करने के लिये मुख्यमंत्री किसान आय बढ़ोत्तरी योजना को मंजूरी दी है। इस अनूठी योजना के अन्तर्गत किसान के एक एकड़ खेत के अधिकतम एक तिहाई हिस्से पर सोलर पैनल लगाए जाएँगे और बिजली पैदा की जाएगी।

आईआईएम कोझिकोड और जल स्वावलम्बन

Submitted by editorial on Wed, 07/25/2018 - 17:36
Author
श्रीपद्रे
Source
द वाटर कैचर्स, 2017
आईआईएम कोझिकोड केरल का कोझिकोड सघन वर्षा का क्षेत्र है। साल में 300 मिलीमीटर से ज्यादा वर्षा होती है। लेकिन, कोझिकोड में नए जमाने की पढ़ाई करने के लिये बनाए गए व्यावसायिक संस्थान को फिर भी पानी की समस्या रहती थी। कोझिकोड आईआईएम को जब अपने कैम्पस में पानी की किल्लत दूर करने की जरूरत महसूस हुई तब उन्हें नए जमाने की कोई तकनीकी समझ नहीं आई। उन्होंने पानी बचाने के परम्परागत तरीकों को अपनाना ही बेहतर समझा।

प्रयास

आदिवासियों ने सहेजे माता नु वन

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 14:32
Author
मनीष वैद्य
आदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलआदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलमध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में अपढ़ समझे जाने वाले आदिवासी समाज ने अपने जंगल को सहेजकर पढ़े-लिखे समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है। जिले के 110 गाँवों में खुद आदिवासियों ने अपने बूते आसपास के जंगलों को न सिर्फ सहेजा, बल्कि वहाँ 41 हजार नए पौधों को रोपकर घना जंगल खड़ा करने के लिये भी जतन शुरू कर दिया है।

नोटिस बोर्ड

हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर एकदिवसीय कार्यशाला

Submitted by editorial on Fri, 09/14/2018 - 18:39
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
दिनांक- 15 सितम्बर 2018,
स्थान - मसीही ध्यान केन्द्र, राजपुर, देहरादून
समय - 10-05 बजे तक
दिन - शनिवार

विषय - उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अध्ययन रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण एवं एक दिवसीय कार्यशाला हेतु सादर निमंत्रण


माउंटेन फोरम हिमालय (mountain forum himalayas - MFH) विगत पन्द्रह वर्षों से पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल में स्थानीय स्वशासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयंसेवी संगठन के साथ ही सरकार के भी सहयोग ले रही है। एम.एफ.एच. द्वारा समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों का क्षमता का विकास, पंचायतों का सूक्ष्म नियोजन एवं चुनाव पूर्व मतदाता जागरुकता अभियान जैसी गतिविधियों के माध्यम से राज्य की पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य पिछले काफी सालों से किया जाता रहा है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

Latest

खासम-खास

केरल की चेतावनी - सम्भावित कारण

Submitted by editorial on Sat, 09/15/2018 - 15:16
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
इडुक्की में सूखी पेरियार नदीइडुक्की में सूखी पेरियार नदी (फोटो साभार - फर्स्टपोस्ट)भोपाल से प्रकाशित दैनिक अखबार भास्कर (13 सितम्बर, 2018) में ‘केरल की नई मुसीबत’ के शीर्षक से खबर छपी है। इस खबर के अनुसार जहाँ बाढ़ ने तबाही मचाई थी वहाँ नदियाँ और कुएँ सूखे। अखबार आगे लिखता है कि पिछले माह की 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से गुजरे केरल में अब सूखे का संकट मँडरा रहा है। मात्र तीन सप्ताह के अन्दर बाढ़ग्रस्त इलाकों की नदियों और कुओं का जलस्तर गिरना प्रारम्भ हो चुका है।

Content

उत्तर का “टांका” दक्षिण में

Submitted by editorial on Fri, 07/27/2018 - 18:43
Author
श्रीपद्रे
Source
द वाटर कैचर्स, 2017
थुम्बे बाँध की वजह से नेत्रावती नदी का पानी खारा हो गयाउत्तर भारत के राजस्थान और गुजरात में टांका बहुत प्रचलित और प्राचीन नाम है। टांका भूजल संरक्षण का एक साधन है। लेकिन दक्षिण के किसी राज्य में टांका दिख जाये तो क्या आश्चर्य नहीं होगा? टांका अगर उस राज्य में दिखे जहाँ औसत 4000 मिलीलीटर सालाना वर्षा होती है तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है। जब यह किसी पुराने गिरजाघर में दिख जाये तो उसके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ जाना लाजमी है। यह समझने की जरूरत बढ़ जाती है कि आखिर किसने और क्यों यहाँ टांका बनाया होगा?

जहाँ चाह वहाँ राह

Submitted by editorial on Fri, 07/27/2018 - 18:30
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
सौर ऊर्जादिल्ली सरकार ने, हाल ही में, किसानों की आय में तीन से पाँच गुना तक इजाफा करने के लिये मुख्यमंत्री किसान आय बढ़ोत्तरी योजना को मंजूरी दी है। इस अनूठी योजना के अन्तर्गत किसान के एक एकड़ खेत के अधिकतम एक तिहाई हिस्से पर सोलर पैनल लगाए जाएँगे और बिजली पैदा की जाएगी।

आईआईएम कोझिकोड और जल स्वावलम्बन

Submitted by editorial on Wed, 07/25/2018 - 17:36
Author
श्रीपद्रे
Source
द वाटर कैचर्स, 2017
आईआईएम कोझिकोड केरल का कोझिकोड सघन वर्षा का क्षेत्र है। साल में 300 मिलीमीटर से ज्यादा वर्षा होती है। लेकिन, कोझिकोड में नए जमाने की पढ़ाई करने के लिये बनाए गए व्यावसायिक संस्थान को फिर भी पानी की समस्या रहती थी। कोझिकोड आईआईएम को जब अपने कैम्पस में पानी की किल्लत दूर करने की जरूरत महसूस हुई तब उन्हें नए जमाने की कोई तकनीकी समझ नहीं आई। उन्होंने पानी बचाने के परम्परागत तरीकों को अपनाना ही बेहतर समझा।

प्रयास

आदिवासियों ने सहेजे माता नु वन

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 14:32
Author
मनीष वैद्य
आदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलआदिवासियों के प्रयास से हरा-भरा हुआ जंगलमध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में अपढ़ समझे जाने वाले आदिवासी समाज ने अपने जंगल को सहेजकर पढ़े-लिखे समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है। जिले के 110 गाँवों में खुद आदिवासियों ने अपने बूते आसपास के जंगलों को न सिर्फ सहेजा, बल्कि वहाँ 41 हजार नए पौधों को रोपकर घना जंगल खड़ा करने के लिये भी जतन शुरू कर दिया है।

नोटिस बोर्ड

हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर एकदिवसीय कार्यशाला

Submitted by editorial on Fri, 09/14/2018 - 18:39
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
दिनांक- 15 सितम्बर 2018,
स्थान - मसीही ध्यान केन्द्र, राजपुर, देहरादून
समय - 10-05 बजे तक
दिन - शनिवार

विषय - उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अध्ययन रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण एवं एक दिवसीय कार्यशाला हेतु सादर निमंत्रण


माउंटेन फोरम हिमालय (mountain forum himalayas - MFH) विगत पन्द्रह वर्षों से पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल में स्थानीय स्वशासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयंसेवी संगठन के साथ ही सरकार के भी सहयोग ले रही है। एम.एफ.एच. द्वारा समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों का क्षमता का विकास, पंचायतों का सूक्ष्म नियोजन एवं चुनाव पूर्व मतदाता जागरुकता अभियान जैसी गतिविधियों के माध्यम से राज्य की पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य पिछले काफी सालों से किया जाता रहा है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

Upcoming Event

Popular Articles