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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

चीड़ से ‘मोहब्बत’ में झुलसता पहाड़

Submitted by HindiWater on Mon, 07/08/2019 - 13:37

 धधकते जंगल। धधकते जंगल।

उत्तराखंड में हर साल औसतन ढाई हजार हेक्टेअर जंगल जल रहे हैं, गर्मियां शुरू होते ही पहाड ़पर हाहाकार शुरू हो जाता है। हर ओर धुंध ही धुंध। जलते जंगलों के बीच अक्सर सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। पहाड़ों पर जंगल में आग फैलने के साथ ही शुरू होता है आग के कारणों पर बहस का एक अंतहीन सिलसिला। वन विभाग ‘खलनायक’ की भूमिका में नजर आने लगता है, तो दोष स्थानीय ग्रामीणों के सिर भी जाता है । दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि असल कारण हर कोई जानता है, मगर उसका उपाय न सरकार करना चाहती है और न महकमा। दरअसल पहाड़ में आग का असल कारण है चीड, जिसकी सूखी पत्तियों के कारण आज पूरा पहाड़ ‘बारूद’ के ढेर पर है। आश्चर्य यह है कि सरकार इसे खत्म करने या रोकने के बजाय उसकी सूखी पत्तियों से कभी बिजली और ईधन बनाने की योजनाएं बनाकर राज्य की आर्थिकी मजबूत करने और बेरोजगारी दूर करने का दावा करती है, तो कभी चीड़ की सूखी पत्तियों से चेकडैम बनाकर भूकटाव रोकने की बात करती है। न जाने क्यों सरकार और उसके सलाहकार यह भूल जाते हैं कि इन योजनाओं से न तो चीड़ के दुष्प्रभावों में ही कमी आएगी और न उसका मूल स्वभाव ही बदलेगा।

क्या है मानसून का अर्थ?

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/08/2019 - 12:02
Author
सुनीता नारायण
Source
झंकार, दैनिक जागरण, 7 जुलाई 2019
पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है।पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है। एक भारतीय चीज ऐसी है जो गांव-शहर, गरीब-अमीर में बंटे सभी लोगों के बीच फैली है, वह है मानसून। जिसे हम हर वर्ष देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं। तापमान का चढ़ना और मानसून का दस्तक देना, यह हर वर्ष बिना किसी बाधा के होता है। किसान बहुत ही बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं क्योंकि उन्हें नई फसल की बुआई के लिए समय पर बारिश चाहिए। शहर के प्रबंधकों को भी मानसून का इंतजार होता है क्योंकि हर वर्ष मानसून की शुरुआत से पहले उनके जलाशय खाली होते हैं और शहर की जलापूर्ति सामान्य से कम होती है।

सरकार के 2019-20 के बजट में पानी और पर्यावरण को जगह

Submitted by UrbanWater on Sat, 07/06/2019 - 16:20
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना पहला बजट पेश किया।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना पहला बजट पेश किया। इस बजट से पहले सरकार ने पानी की सारी समस्याओं के लिए ‘जल शक्ति मंत्रालय’ बनाया है। जिसने लक्ष्य रखा है कि 2024 तक हर घर तक जल पहुंचाएगा। जल के लिए इस बजट में वही जगह दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्यावरण मंत्रालय के बजट, जल शक्ति मंत्रालय का लक्ष्य और स्वच्छ भारत मिशन के बारे में अपनी स्पीच में जानकारी दी। जब देश जल संकट के भयावह दौर से गुजर रहा है, नीति आयोग की रिपोर्ट साफ-साफ कह रही है कि 2021 तक देश के 21 बड़े शहर जल संकट की चपेट में होंगे। इसके बावजूद इस बजट में जल संकट और जल संरक्षण को बहुत कम जगह दी गई।

प्रयास

इंजेक्शन पद्धति से सूख चुके हैंडपंपों को किया जा रहा रिचार्ज

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/19/2019 - 12:53
Source
दैनिक जागरण, 19 जुलाई 2019
देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है।देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। भूजल स्तर घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता। देशभर में ऐसे सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन आपसे यदि कहा जाए कि यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं, तो सुनकर अचंभा होगा। श्योपुर, मध्यप्रदेश के आदिवासी विकास खंड कराहल के चार गांवों में ऐसा होते हुए देखा जा सकता है। इन चारों गांवों के 11 सूखे हैंडपंप और दो कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लौट आया। गांव में जो हैंडपंप और कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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चीड़ से ‘मोहब्बत’ में झुलसता पहाड़

Submitted by HindiWater on Mon, 07/08/2019 - 13:37

 धधकते जंगल। धधकते जंगल।

उत्तराखंड में हर साल औसतन ढाई हजार हेक्टेअर जंगल जल रहे हैं, गर्मियां शुरू होते ही पहाड ़पर हाहाकार शुरू हो जाता है। हर ओर धुंध ही धुंध। जलते जंगलों के बीच अक्सर सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। पहाड़ों पर जंगल में आग फैलने के साथ ही शुरू होता है आग के कारणों पर बहस का एक अंतहीन सिलसिला। वन विभाग ‘खलनायक’ की भूमिका में नजर आने लगता है, तो दोष स्थानीय ग्रामीणों के सिर भी जाता है । दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि असल कारण हर कोई जानता है, मगर उसका उपाय न सरकार करना चाहती है और न महकमा। दरअसल पहाड़ में आग का असल कारण है चीड, जिसकी सूखी पत्तियों के कारण आज पूरा पहाड़ ‘बारूद’ के ढेर पर है। आश्चर्य यह है कि सरकार इसे खत्म करने या रोकने के बजाय उसकी सूखी पत्तियों से कभी बिजली और ईधन बनाने की योजनाएं बनाकर राज्य की आर्थिकी मजबूत करने और बेरोजगारी दूर करने का दावा करती है, तो कभी चीड़ की सूखी पत्तियों से चेकडैम बनाकर भूकटाव रोकने की बात करती है। न जाने क्यों सरकार और उसके सलाहकार यह भूल जाते हैं कि इन योजनाओं से न तो चीड़ के दुष्प्रभावों में ही कमी आएगी और न उसका मूल स्वभाव ही बदलेगा।

क्या है मानसून का अर्थ?

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/08/2019 - 12:02
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सुनीता नारायण
Source
झंकार, दैनिक जागरण, 7 जुलाई 2019
पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है।पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है। एक भारतीय चीज ऐसी है जो गांव-शहर, गरीब-अमीर में बंटे सभी लोगों के बीच फैली है, वह है मानसून। जिसे हम हर वर्ष देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं। तापमान का चढ़ना और मानसून का दस्तक देना, यह हर वर्ष बिना किसी बाधा के होता है। किसान बहुत ही बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं क्योंकि उन्हें नई फसल की बुआई के लिए समय पर बारिश चाहिए। शहर के प्रबंधकों को भी मानसून का इंतजार होता है क्योंकि हर वर्ष मानसून की शुरुआत से पहले उनके जलाशय खाली होते हैं और शहर की जलापूर्ति सामान्य से कम होती है।

सरकार के 2019-20 के बजट में पानी और पर्यावरण को जगह

Submitted by UrbanWater on Sat, 07/06/2019 - 16:20
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना पहला बजट पेश किया।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना पहला बजट पेश किया। इस बजट से पहले सरकार ने पानी की सारी समस्याओं के लिए ‘जल शक्ति मंत्रालय’ बनाया है। जिसने लक्ष्य रखा है कि 2024 तक हर घर तक जल पहुंचाएगा। जल के लिए इस बजट में वही जगह दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्यावरण मंत्रालय के बजट, जल शक्ति मंत्रालय का लक्ष्य और स्वच्छ भारत मिशन के बारे में अपनी स्पीच में जानकारी दी। जब देश जल संकट के भयावह दौर से गुजर रहा है, नीति आयोग की रिपोर्ट साफ-साफ कह रही है कि 2021 तक देश के 21 बड़े शहर जल संकट की चपेट में होंगे। इसके बावजूद इस बजट में जल संकट और जल संरक्षण को बहुत कम जगह दी गई।

प्रयास

इंजेक्शन पद्धति से सूख चुके हैंडपंपों को किया जा रहा रिचार्ज

Submitted by UrbanWater on Fri, 07/19/2019 - 12:53
Source
दैनिक जागरण, 19 जुलाई 2019
देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है।देशभर में सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। भूजल स्तर घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता। देशभर में ऐसे सूखे हैंडपंपों को मुंह चिढ़ाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन आपसे यदि कहा जाए कि यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं, तो सुनकर अचंभा होगा। श्योपुर, मध्यप्रदेश के आदिवासी विकास खंड कराहल के चार गांवों में ऐसा होते हुए देखा जा सकता है। इन चारों गांवों के 11 सूखे हैंडपंप और दो कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लौट आया। गांव में जो हैंडपंप और कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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