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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 15:58
Source:
हर घर नल से क्या रुक पाएगा पानी का अतिक्रमण
विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में हर साल औसतन 1529 मिमी बारिश होती है, जिसमें अकेले चौमासे यानी मानसून की भागीदारी 1221.9 मिमी है। बारिश का यह पानी हर साल यूं ही जाया हो जाता है। हालांकि, खाल-चाल, खंत्तियां, चेकडैम जैसे उपायों के जरिये इसे रोकने के प्रयास विभिन्न विभागों के स्तर पर हुए हैं, लेकिन इनमें तेजी की दरकार है। राज्य में निरंतर सूखते जलस्रोतों को बचाने के लिए यह जरूरी भी है। नीति आयोग की रिपोर्ट ही बताती है कि उत्तराखंड में 300 के करीब जलस्रोत सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं। इस सबको देखते हुए राज्य सरकार ने भी जल संरक्षण को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। 
Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 15:52
Source:
'नौल', फोटो- कौशल सक्सेना, दून पुस्तकालय देहरादून
नौल की संरचना एक वर्गाकार लघु बावड़ी की तरह ही होती है। इसका निर्माण उस जगह पर किया जाता है जहां पानी जमीन से रिस-रिस कर बाहर निकलता है। मन्दिर के प्रारुप में बने नौलकी तीन दिशाएं बंद रहती हैं और चैथी दिशा को खुला रखा जाता है। नौल में गन्दगी आदि न जा सके इसके  लिए छत को पाथरों (स्लेट) से ढका जाता है। जल कुण्ड का आकार वर्गाकार वेदी की तरह होता है जो उपर की ओर अधिक और तल की ओर धीरे-धीरे कम चैड़ाई लिए रहता है। कुछ जगहों पर नौल  का एक अन्य रुप भी पाया जाता है जिसे ’चुपटौल’ कहा जाता है। ’चुपटौल’ की बनावट नौल  की तरह न होकर अनगढ़ स्वरुप में रहती है। स्रोत के पास गड्ढा कर सपाट पत्थरों की बंध बनाकर जल को रोक दिया जाता है और इसमें छत नहीं होती है। खास तौर पर नौल के स्रोत बहुत संवेदनशील होते हैं।
Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 13:21
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एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के खजाने !
जल संरक्षण परम्पराओं की प्राचीन तकनीक में पूरी दुनिया में भारत का अपना स्थान है। भारत का हृदय - मध्य प्रदेश भी इस संदर्भ में देश में अपना अहम स्थान रखता है। प्रदेश के मालवा, निमाड़, ग्वालियर, चम्बल, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, महाकौशल और मध्य क्षेत्र में विविध परंपराओं की झलक दिखाई देती है। यहाँ प्रमुख तकनीकी में पहाड़ियों, किलों में जल प्रबंधन, बड़े तालाब, कुएँ, कुण्ड, बावड़ियाँ, बन्धन तो है ही लेकिन कुछ अद्भुत परम्पराएँ भी यहाँ आकर्षण का कारण है। लेकिन अफसोस की बात है कि एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के यह खजाने ..!!!

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

Content

हर घर नल से क्या रुक पाएगा पानी का अतिक्रमण

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 15:58
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 हर घर नल से क्या रुक पाएगा पानी का अतिक्रमण
विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में हर साल औसतन 1529 मिमी बारिश होती है, जिसमें अकेले चौमासे यानी मानसून की भागीदारी 1221.9 मिमी है। बारिश का यह पानी हर साल यूं ही जाया हो जाता है। हालांकि, खाल-चाल, खंत्तियां, चेकडैम जैसे उपायों के जरिये इसे रोकने के प्रयास विभिन्न विभागों के स्तर पर हुए हैं, लेकिन इनमें तेजी की दरकार है। राज्य में निरंतर सूखते जलस्रोतों को बचाने के लिए यह जरूरी भी है। नीति आयोग की रिपोर्ट ही बताती है कि उत्तराखंड में 300 के करीब जलस्रोत सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं। इस सबको देखते हुए राज्य सरकार ने भी जल संरक्षण को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। 

समृद्ध जल संस्कृति के संवाहक हैं : 'नौल'

Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 15:52
samruddh-jal-sanskriti-k-samvahak-hain-:-'naul'
'नौल', फोटो- कौशल सक्सेना, दून पुस्तकालय देहरादून
नौल की संरचना एक वर्गाकार लघु बावड़ी की तरह ही होती है। इसका निर्माण उस जगह पर किया जाता है जहां पानी जमीन से रिस-रिस कर बाहर निकलता है। मन्दिर के प्रारुप में बने नौलकी तीन दिशाएं बंद रहती हैं और चैथी दिशा को खुला रखा जाता है। नौल में गन्दगी आदि न जा सके इसके  लिए छत को पाथरों (स्लेट) से ढका जाता है। जल कुण्ड का आकार वर्गाकार वेदी की तरह होता है जो उपर की ओर अधिक और तल की ओर धीरे-धीरे कम चैड़ाई लिए रहता है। कुछ जगहों पर नौल  का एक अन्य रुप भी पाया जाता है जिसे ’चुपटौल’ कहा जाता है। ’चुपटौल’ की बनावट नौल  की तरह न होकर अनगढ़ स्वरुप में रहती है। स्रोत के पास गड्ढा कर सपाट पत्थरों की बंध बनाकर जल को रोक दिया जाता है और इसमें छत नहीं होती है। खास तौर पर नौल के स्रोत बहुत संवेदनशील होते हैं।

एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के खजाने

Submitted by HindiWater on Mon, 03/22/2021 - 13:21
Author
क्रांति चतुर्वेदी
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एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के खजाने !
जल संरक्षण परम्पराओं की प्राचीन तकनीक में पूरी दुनिया में भारत का अपना स्थान है। भारत का हृदय - मध्य प्रदेश भी इस संदर्भ में देश में अपना अहम स्थान रखता है। प्रदेश के मालवा, निमाड़, ग्वालियर, चम्बल, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, महाकौशल और मध्य क्षेत्र में विविध परंपराओं की झलक दिखाई देती है। यहाँ प्रमुख तकनीकी में पहाड़ियों, किलों में जल प्रबंधन, बड़े तालाब, कुएँ, कुण्ड, बावड़ियाँ, बन्धन तो है ही लेकिन कुछ अद्भुत परम्पराएँ भी यहाँ आकर्षण का कारण है। लेकिन अफसोस की बात है कि एमपी में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं पानी परंपराओं के यह खजाने ..!!!

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
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Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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