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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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Submitted by Shivendra on Fri, 07/29/2022 - 12:46
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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस :क्यों नहीं रूक रही बाघों की मौतें
वही महाराष्ट्र में 2017 से अब तक सबसे ज़्यादा बाघों की मौत हुई है  राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2017 से अब तक महाराष्ट्र में 134  बाघों की मौत हो चुकी है। एनटीसीए के अनुसार, 2017 के बाद से 134 बाघों की मौत में से 17 अकेले 2022 में हुई हैं, जबकि 40 2021 में हुई हैं, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। महाराष्ट्र - जिसमें छह बाघ अभयारण्य आते है वहाँ 2017 में 21 बाघों की मौत, 2018 में
Submitted by Shivendra on Wed, 07/27/2022 - 15:20
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आखिर क्यों बिना बरसे बादल चले जाते हैं
हमें थोड़े से भी काले बादल दिखाई देते हैं तो हमारे चेहरे में मुस्कुराहट आ जाती है। कई बार ऐसा होता है कि आसमान में सिर्फ काले ही बादल नजर आते हैं। जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि
Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 16:53
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आखिर बाढ़ की स्थिति क्यों जानना जरूरी है
आखिर ऐसा क्यों हों रहा है, जहां बाढ़ नहीं आने चाहिए वहां भी हालात गम्भीर बने हुए है  यह जानना-समझना बहुत जरूरी है । बाढ़ बहते पानी के रास्ते में अवरोध पैदा करने या एका एक बादल फटने जैसी स्थिति होने से उत्पन्न होते हैं जैसे श्रीगंगानगर में इस सप्ताह एक साथ 312 mm वर्ष हुईं, जिससे बाढ़ के हालात बने, प्रशासन नाकामयाब रहा, सेना बुलाई गई  तब जाकर लोगों को रहात प्राप्त हुईं।  यहां औसत वर्षा  205mm होती हैं लेकिन बादलों के जोशीले स्वभाव ने हालात गम्भीर बना दिया है ।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
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यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस :क्यों नहीं रूक रही बाघों की मौतें

Submitted by Shivendra on Fri, 07/29/2022 - 12:46
antarrashtriy-bagh-divas-:kyon-nahi-ruk-rahi-baghon-ki-mauten
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस :क्यों नहीं रूक रही बाघों की मौतें
वही महाराष्ट्र में 2017 से अब तक सबसे ज़्यादा बाघों की मौत हुई है  राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2017 से अब तक महाराष्ट्र में 134  बाघों की मौत हो चुकी है। एनटीसीए के अनुसार, 2017 के बाद से 134 बाघों की मौत में से 17 अकेले 2022 में हुई हैं, जबकि 40 2021 में हुई हैं, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। महाराष्ट्र - जिसमें छह बाघ अभयारण्य आते है वहाँ 2017 में 21 बाघों की मौत, 2018 में

आखिर क्यों बिना बरसे बादल चले जाते हैं

Submitted by Shivendra on Wed, 07/27/2022 - 15:20
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आखिर क्यों बिना बरसे बादल चले जाते हैं
हमें थोड़े से भी काले बादल दिखाई देते हैं तो हमारे चेहरे में मुस्कुराहट आ जाती है। कई बार ऐसा होता है कि आसमान में सिर्फ काले ही बादल नजर आते हैं। जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि

आखिर बाढ़ की स्थिति क्यों जानना जरूरी है

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 16:53
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आखिर बाढ़ की स्थिति क्यों जानना जरूरी है
आखिर ऐसा क्यों हों रहा है, जहां बाढ़ नहीं आने चाहिए वहां भी हालात गम्भीर बने हुए है  यह जानना-समझना बहुत जरूरी है । बाढ़ बहते पानी के रास्ते में अवरोध पैदा करने या एका एक बादल फटने जैसी स्थिति होने से उत्पन्न होते हैं जैसे श्रीगंगानगर में इस सप्ताह एक साथ 312 mm वर्ष हुईं, जिससे बाढ़ के हालात बने, प्रशासन नाकामयाब रहा, सेना बुलाई गई  तब जाकर लोगों को रहात प्राप्त हुईं।  यहां औसत वर्षा  205mm होती हैं लेकिन बादलों के जोशीले स्वभाव ने हालात गम्भीर बना दिया है ।

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
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Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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