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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

Content

Submitted by Shivendra on Tue, 10/05/2021 - 17:08
Source:
रिपोर्ट अंकित तिवारी
जंगल,पानी बचाने के लिए देश के सबसे बड़े कारोबारी के खिलाफ सबसे बड़ी पदयात्रा
छत्तीसगढ़ के आदिवासी कई सालों से आंदोलित है। आदिवासियों की मांग है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में सरकार तुरंत कोयला खनन परियोजनओं पर पाबन्दी लगाए और भविष्य में ऐसा न हो उसके लिए भी नीति बनाये। लेकिन सरकार अपने निर्णय से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है ऐसे में आदिवासियो ने फैसला लिया है कि वह अपना आंदोलन तब तक जारी रखेंगें जब तक सरकार उनकी मांगो को मानने के लिए तैयार नहीं होती है।  
Submitted by Shivendra on Mon, 10/04/2021 - 15:50
Source:
तालाब या पोखर द्वारा जलसंचय 
 अब हम 'आधुनिक ' हो चले हैं,शहरों की बात छोड़िए गाँवों में भी भूमॉफियाओं द्वारा उन गड्ढों और बावड़ियों को कब्जा करके उसको मिट्टी से पाटकर उस पर 'कथित मॉडर्न पब्लिक स्कूल 'या 'अपनी हवेली 'खड़ी कर लिए हैं,गाँवों में भी पम्पिंग सेट लगाकर उसके पानी को आर.ओ. से शुद्ध करके या बोतलबंद पानी खरीद कर लोग अब पानी पीने को बाध्य हैं,क्योंकि अधिकतर तालतलैयों,गड्ढों और पोखरों के अस्तित्व को मिटा देने से गाँवों में भी पानी पहले की तरह साल भर इकट्ठा नहीं रहता,जिससे जल की धरती में जाने की दर बहुत कम होती जा रही है,गाँवों,कस्बों में भी भूगर्भीय जल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है,फलस्वरूप गाँवों,कस्बों के कुँए और हैंडपंप भी सूखने लग रहे हैं।
Submitted by Shivendra on Thu, 09/30/2021 - 12:51
Source:
भूजल का सिंचाई में उपयोग
ताजा प्रकाशित शोध अध्ययनों के अनुसार देश के अधिकाँश हिस्सों में भूमिगत जल फ्लोराइड रसायन से दूषित है l इस फ्लोराइडयुक्त जल को लम्बी अवधि तक सेवन अथवा पिने पर मनुष्यों व पालतू पशुओं में विकलांगता के अलावा कई तरह की ठीक नहीं होने वाली शारीरिक विकृतियाँ एक के बाद एक पनपने लगती है l इन विकृतियों को वैज्ञानिक भाषा में फ्लोरोसिस कहतें है l लेकिन इस फ्लोराइडयुक्त भूजल से सिंचाई करने पर खेत की मिट्टी भी फ्लोराइड से दूषित हो जाती है जिसके कारण इसमें उगी विभिन्न प्रकार की फसलों को अत्याधिक नुकसान होता है l फ्लोराइड के विषैलेपन के असर से फसलों की पतियाँ बांकी-टेड़ी हो कर पिली पड़ जाती है जो कमजोर पड़ कर एक-एक करके तने से गिरने लगती है l इसके विषैलेपन के कारण  फसलों के तने भी कमजोर पड़ कर बांके-टेड़े हो जातें है अथवा निचे की ओर झुक कर जमींन पर गिर जातें है l खेतों में ऊगी फसलों का ऐसा दृश्य आसानी से देखा व पहचाना जा सकता है l क्योंकि यह दृश्य पुरे खेत में देखने को मिलता है l

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
Source:
गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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जंगल,पानी बचाने के लिए देश के सबसे बड़े कारोबारी के खिलाफ सबसे बड़ी पदयात्रा

Submitted by Shivendra on Tue, 10/05/2021 - 17:08
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रिपोर्ट अंकित तिवारी
जंगल,पानी बचाने के लिए देश के सबसे बड़े कारोबारी के खिलाफ सबसे बड़ी पदयात्रा
छत्तीसगढ़ के आदिवासी कई सालों से आंदोलित है। आदिवासियों की मांग है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में सरकार तुरंत कोयला खनन परियोजनओं पर पाबन्दी लगाए और भविष्य में ऐसा न हो उसके लिए भी नीति बनाये। लेकिन सरकार अपने निर्णय से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है ऐसे में आदिवासियो ने फैसला लिया है कि वह अपना आंदोलन तब तक जारी रखेंगें जब तक सरकार उनकी मांगो को मानने के लिए तैयार नहीं होती है।  

तालाब या पोखर द्वारा जलसंचय बनाम आज की कथित आधुनिकता

Submitted by Shivendra on Mon, 10/04/2021 - 15:50
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तालाब या पोखर द्वारा जलसंचय 
 अब हम 'आधुनिक ' हो चले हैं,शहरों की बात छोड़िए गाँवों में भी भूमॉफियाओं द्वारा उन गड्ढों और बावड़ियों को कब्जा करके उसको मिट्टी से पाटकर उस पर 'कथित मॉडर्न पब्लिक स्कूल 'या 'अपनी हवेली 'खड़ी कर लिए हैं,गाँवों में भी पम्पिंग सेट लगाकर उसके पानी को आर.ओ. से शुद्ध करके या बोतलबंद पानी खरीद कर लोग अब पानी पीने को बाध्य हैं,क्योंकि अधिकतर तालतलैयों,गड्ढों और पोखरों के अस्तित्व को मिटा देने से गाँवों में भी पानी पहले की तरह साल भर इकट्ठा नहीं रहता,जिससे जल की धरती में जाने की दर बहुत कम होती जा रही है,गाँवों,कस्बों में भी भूगर्भीय जल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है,फलस्वरूप गाँवों,कस्बों के कुँए और हैंडपंप भी सूखने लग रहे हैं।

भूजल का सिंचाई में अत्याधिक उपयोग, फसलों के लिए नुकसानदायक

Submitted by Shivendra on Thu, 09/30/2021 - 12:51
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भूजल का सिंचाई में उपयोग
ताजा प्रकाशित शोध अध्ययनों के अनुसार देश के अधिकाँश हिस्सों में भूमिगत जल फ्लोराइड रसायन से दूषित है l इस फ्लोराइडयुक्त जल को लम्बी अवधि तक सेवन अथवा पिने पर मनुष्यों व पालतू पशुओं में विकलांगता के अलावा कई तरह की ठीक नहीं होने वाली शारीरिक विकृतियाँ एक के बाद एक पनपने लगती है l इन विकृतियों को वैज्ञानिक भाषा में फ्लोरोसिस कहतें है l लेकिन इस फ्लोराइडयुक्त भूजल से सिंचाई करने पर खेत की मिट्टी भी फ्लोराइड से दूषित हो जाती है जिसके कारण इसमें उगी विभिन्न प्रकार की फसलों को अत्याधिक नुकसान होता है l फ्लोराइड के विषैलेपन के असर से फसलों की पतियाँ बांकी-टेड़ी हो कर पिली पड़ जाती है जो कमजोर पड़ कर एक-एक करके तने से गिरने लगती है l इसके विषैलेपन के कारण  फसलों के तने भी कमजोर पड़ कर बांके-टेड़े हो जातें है अथवा निचे की ओर झुक कर जमींन पर गिर जातें है l खेतों में ऊगी फसलों का ऐसा दृश्य आसानी से देखा व पहचाना जा सकता है l क्योंकि यह दृश्य पुरे खेत में देखने को मिलता है l

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
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Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

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