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खासम-खास

Submitted by Shivendra on Tue, 01/18/2022 - 14:44
2441 मीटर लंबा तुंगभद्रा बांध
भारत में पानी की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है वहीं गाद जमाव के कारण बुढ़ाते बडे बाधों की भंडारण क्षमता लगातार कम हो रही है। भंडारण क्षमता कम होने के कारण उनमें, साल-दर-साल कम पानी जमा हो रहा है। पानी के घटते भंडारण के कारण भी प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष जल संकट अर्थात पेयजल, निस्तार, खेती, उद्योग तथा पनबिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। भविष्य में उसके और बढ़ने की संभावना है। अर्थात बढ़ती मांग के संदर्भ में पानी की टिकाऊ उपलब्धता पर साल-दर-साल खतरा बढ़ रहा है। उम्र बढ़ने के कारण, बडे बांधों में, संरचनात्मक क्षति होती है। भारत के बांध इसका अपवाद नहीं हैं। यह क्षति मुख्यतः पाल और वेस्टवियर पर होती है। पाल और वेस्टवियर की क्षति पानी की तरंगों के सतत प्रहार तथा पाल की सतह पर बरसाती पानी की मार के कारण होती है।

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Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:38
Source:
स्वर्गीय सुन्दर लाल बहुगुणा,पर्यावरण संरक्षण के एक अद्वितीय मसीहा
9 जनवरी 1927 में टिहरी में जन्मे स्वर्गीय सुन्दर लाल बहुगुणा जी श्रीमती विमला बहुगुणा जी से 1956 में शादी के पवित्र बंधन में बंधते ही राजनीति को सदा के लिए तिलांजलि देकर, पूर्णरूपेण अपना जीवन पर्यावरण को,पेड़ों को बचाने तथा अन्य अनेक बुराइयों को इस दुनिया से उखाड़ फेंकने को कृत संकल्पित हो गये,अपने इस पवित्र और पुनीत संकल्प को उन्होंने जीवनपर्यंत पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से निभाया। चिपको आंदोलन के माध्यम से पेड़ों और वनों को बचाने के सिद्धांत को हम दूसरे शब्दों में यूँ समझ सकते हैं कि इस धरती पर पेड़-पौधे और हरियाली बचेगी,तभी हमारे जीवन के मूलाधार सूर्यदेव अपने प्रकाश के रूप में इस धरती पर उतरकर प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से इस धरती के समस्त जैवमण्डल के लिए खाद्यान्न का उत्पादन कर सकते हैं । 
Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:07
Source:
लोक विज्ञान संस्थान,देहरादून
सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग कार्य
उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।
Submitted by Shivendra on Fri, 01/07/2022 - 13:30
Source:
चरखा फीचर
पोखंडी तालाब,फोटो साभार:दिलीप बीदावत
मंडोर से विस्थापित होकर वर्तमान मूंडवा कस्बा बसाया गया. उस समय पीने के पानी का संकट यहां की प्रमुख समस्या थी. भूजल गहरा तथा अत्यंत खारा था. बरसात के पानी को सहेजने के लिए छोटे-छोटे नाले और तलाइयां बनाई गयी जिनमें से आज कुछ विशाल तालाब का रूप ले चुके हैं. कस्बे के बीच बने पोखंडी व लाखा तालाब न केवल कस्बे की पेयजल पूर्ति के संसाधन है, बल्कि इनके आगौर में वृक्षों की हरियाली वातावरण को शुद्ध करती है. यह समुदाय और नगरपालिका की उन्नत प्रबंधन व्यवस्था का कमाल है, कि कस्बे के बीच होने के बावजूद दोनों तालाब स्वच्छ, सुंदर और रमणीय स्थल बने हुए हैं. तालाबों की सुरक्षा, संरक्षण और प्रबंधन व्यवस्था जन शक्ति से जल शक्ति का आदर्श मॉडल देखना है, तो मूंडवा जरूर आना चाहिए.

प्रयास

Submitted by Shivendra on Wed, 01/19/2022 - 15:31
पानी-पर्यावरण आंदोलन की अम्मा-मायलम्मा
मायलम्मा का सालों भर पानी से लबालब रहनेवाला कुआँ जब अचानक ही सूखा तो उनके पचास साला अनुभवी दिमाग ने भाँप लिया कि ऐसा क्‍यों हो रहा है। इरावलार जनजाति की इस महिला की आँखों ने अपनी आनेवाली पीढ़ियों की तबाही का मंजर देख लिया था। उनका कहना था- “तीन वर्षों में इतनी बर्बादी हुई है, तो दस-पन्द्रह वर्षों बाद क्या हालत होगी! तब हमारे बच्चे हमें कोसते हुए इस बंजर भूमि पर रहने के लिए अभिशप्त होंगे।” उन्हें लगा कि यदि उन्होंने और उनके समुदाय ने भावी जीवन के लिए जल नहीं बचाया तो आनेवाली पीढ़ियाँ उन्हें माफ नहीं करेंगी। फिर क्या था, मायलम्मा ने समुदाय की औरतों को एकत्र कर “कोका कोला विरुद्ध समर समिति” का गठन किया। और फिर शुरू हुई दुनिया के दो सौ देशों में व्यवसाय करनेवाले कारपोरेटी दानव के खिलाफ जंग।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 12/06/2021 - 14:01
Source:
एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
इंडिया वाटर पार्टनरशिप द्वारा जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड में जल संसाधानों की क्षमता को बढ़ाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जल संसाधनो पर काम कर रहे राज्य के तमाम सरकारी विभागों संस्था और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। इंडिया वाटर पार्टनरशिप मैनजमेंट (IWRM)  की इस उत्साहपूर्वक पहल से राज्य सरकार को पानी को लेकर हालही की चुनौतियों और हर क्षेत्र में उसका सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 
Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
Source:
चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

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खासम-खास

बांधों पर मंडराता खतरा: टिकाऊ माडल की तलाश

Submitted by Shivendra on Tue, 01/18/2022 - 14:44
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास'
bandhon-per-mandrata-khatra:-tikau-model-ki-talash
2441 मीटर लंबा तुंगभद्रा बांध
भारत में पानी की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है वहीं गाद जमाव के कारण बुढ़ाते बडे बाधों की भंडारण क्षमता लगातार कम हो रही है। भंडारण क्षमता कम होने के कारण उनमें, साल-दर-साल कम पानी जमा हो रहा है। पानी के घटते भंडारण के कारण भी प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष जल संकट अर्थात पेयजल, निस्तार, खेती, उद्योग तथा पनबिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। भविष्य में उसके और बढ़ने की संभावना है। अर्थात बढ़ती मांग के संदर्भ में पानी की टिकाऊ उपलब्धता पर साल-दर-साल खतरा बढ़ रहा है। उम्र बढ़ने के कारण, बडे बांधों में, संरचनात्मक क्षति होती है। भारत के बांध इसका अपवाद नहीं हैं। यह क्षति मुख्यतः पाल और वेस्टवियर पर होती है। पाल और वेस्टवियर की क्षति पानी की तरंगों के सतत प्रहार तथा पाल की सतह पर बरसाती पानी की मार के कारण होती है।

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स्वर्गीय सुन्दर लाल बहुगुणा,पर्यावरण संरक्षण के एक अद्वितीय मसीहा

Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:38
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स्वर्गीय सुन्दर लाल बहुगुणा,पर्यावरण संरक्षण के एक अद्वितीय मसीहा
9 जनवरी 1927 में टिहरी में जन्मे स्वर्गीय सुन्दर लाल बहुगुणा जी श्रीमती विमला बहुगुणा जी से 1956 में शादी के पवित्र बंधन में बंधते ही राजनीति को सदा के लिए तिलांजलि देकर, पूर्णरूपेण अपना जीवन पर्यावरण को,पेड़ों को बचाने तथा अन्य अनेक बुराइयों को इस दुनिया से उखाड़ फेंकने को कृत संकल्पित हो गये,अपने इस पवित्र और पुनीत संकल्प को उन्होंने जीवनपर्यंत पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से निभाया। चिपको आंदोलन के माध्यम से पेड़ों और वनों को बचाने के सिद्धांत को हम दूसरे शब्दों में यूँ समझ सकते हैं कि इस धरती पर पेड़-पौधे और हरियाली बचेगी,तभी हमारे जीवन के मूलाधार सूर्यदेव अपने प्रकाश के रूप में इस धरती पर उतरकर प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से इस धरती के समस्त जैवमण्डल के लिए खाद्यान्न का उत्पादन कर सकते हैं । 

पाली सोलर लिफ्टिंग योजना: एक साझा अनुभव

Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:07
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लोक विज्ञान संस्थान,देहरादून
सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग कार्य
उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।

जन शक्ति से जल शक्ति की मिसाल है मूंडवा गांव

Submitted by Shivendra on Fri, 01/07/2022 - 13:30
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चरखा फीचर
पोखंडी तालाब,फोटो साभार:दिलीप बीदावत
मंडोर से विस्थापित होकर वर्तमान मूंडवा कस्बा बसाया गया. उस समय पीने के पानी का संकट यहां की प्रमुख समस्या थी. भूजल गहरा तथा अत्यंत खारा था. बरसात के पानी को सहेजने के लिए छोटे-छोटे नाले और तलाइयां बनाई गयी जिनमें से आज कुछ विशाल तालाब का रूप ले चुके हैं. कस्बे के बीच बने पोखंडी व लाखा तालाब न केवल कस्बे की पेयजल पूर्ति के संसाधन है, बल्कि इनके आगौर में वृक्षों की हरियाली वातावरण को शुद्ध करती है. यह समुदाय और नगरपालिका की उन्नत प्रबंधन व्यवस्था का कमाल है, कि कस्बे के बीच होने के बावजूद दोनों तालाब स्वच्छ, सुंदर और रमणीय स्थल बने हुए हैं. तालाबों की सुरक्षा, संरक्षण और प्रबंधन व्यवस्था जन शक्ति से जल शक्ति का आदर्श मॉडल देखना है, तो मूंडवा जरूर आना चाहिए.

प्रयास

पानी-पर्यावरण आंदोलन की अम्मा - मायलम्मा

Submitted by Shivendra on Wed, 01/19/2022 - 15:31
pani-paryavaran-andolan-key-amma---mayalamma
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पानी पत्रक
पानी-पर्यावरण आंदोलन की अम्मा-मायलम्मा
मायलम्मा का सालों भर पानी से लबालब रहनेवाला कुआँ जब अचानक ही सूखा तो उनके पचास साला अनुभवी दिमाग ने भाँप लिया कि ऐसा क्‍यों हो रहा है। इरावलार जनजाति की इस महिला की आँखों ने अपनी आनेवाली पीढ़ियों की तबाही का मंजर देख लिया था। उनका कहना था- “तीन वर्षों में इतनी बर्बादी हुई है, तो दस-पन्द्रह वर्षों बाद क्या हालत होगी! तब हमारे बच्चे हमें कोसते हुए इस बंजर भूमि पर रहने के लिए अभिशप्त होंगे।” उन्हें लगा कि यदि उन्होंने और उनके समुदाय ने भावी जीवन के लिए जल नहीं बचाया तो आनेवाली पीढ़ियाँ उन्हें माफ नहीं करेंगी। फिर क्या था, मायलम्मा ने समुदाय की औरतों को एकत्र कर “कोका कोला विरुद्ध समर समिति” का गठन किया। और फिर शुरू हुई दुनिया के दो सौ देशों में व्यवसाय करनेवाले कारपोरेटी दानव के खिलाफ जंग।

नोटिस बोर्ड

जल संसाधन प्रबंधन पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Submitted by Shivendra on Mon, 12/06/2021 - 14:01
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 एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
इंडिया वाटर पार्टनरशिप द्वारा जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड में जल संसाधानों की क्षमता को बढ़ाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जल संसाधनो पर काम कर रहे राज्य के तमाम सरकारी विभागों संस्था और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। इंडिया वाटर पार्टनरशिप मैनजमेंट (IWRM)  की इस उत्साहपूर्वक पहल से राज्य सरकार को पानी को लेकर हालही की चुनौतियों और हर क्षेत्र में उसका सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
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चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

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