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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

Content

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/23/2020 - 10:28
Source:
‘धाद’ फरवरी 1992, देहरादून
एक लम्बी खाल, फोटोः needpix.com
जल प्रबंधन के क्षेत्र में हमारी अज्ञानता अर्थात उदासीनता के कारण इस सच्चाई को भी नहीं नकारा जा सकता है कि पहाड़ों से लोग 'रोटी' के लिये ही नहीं अपितु 'पानी' के लिए भी पलायन कर रहे हैं। यह विडम्बना ही है कि उत्तराखंड के सैकड़ों गाँव आजादी के इतने दशक बीतने के बाद भी साल के सात-आठ महीने पानी के लिए तरसते हैं।
Submitted by HindiWater on Fri, 11/13/2020 - 10:56
Source:
चरखा फीचर्स
संजॉय घोष मीडिया अवार्ड 2020’ का परिणाम घोषित
दिल्ली स्थित एनजीओ ‘चरखा विकास संचार नेटवर्क’ ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2020’ के लिए चयनित प्रतिभागियों के नामों की घोषणा कर दी है। प्रतिभागियों का चयन तीन सदस्यों की जूरी पैनल द्वारा किया गया। जिसकी अध्यक्षता द वायर की सुश्री पैमला फिलीपोज़ ने की। अन्य सदस्यों में अमर उजाला से श्री सुदीप ठाकुर और गाँव कनेक्शन से सुश्री निधि जम्वाल थीं।
Submitted by HindiWater on Tue, 11/10/2020 - 12:09
Source:
कोसी मित्र
जब 1984 को पूर्वी कोसी तटबंध टूटा...
पूर्वी कोसी तटबंध के 72-78 कि. मी. के बीच कोसी का जलस्तर ख़तरे के निशान को पार कर चुका है। बाँध कभी भी टूट सकता है। नागरिकों को चेताया जाता है कि वे अपने घरों को ख़ाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ...

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
Source:
वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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पहाड़ से पलायन का एक कारण है पानी

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/23/2020 - 10:28
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‘धाद’ फरवरी 1992, देहरादून
एक लम्बी खाल, फोटोः needpix.com
जल प्रबंधन के क्षेत्र में हमारी अज्ञानता अर्थात उदासीनता के कारण इस सच्चाई को भी नहीं नकारा जा सकता है कि पहाड़ों से लोग 'रोटी' के लिये ही नहीं अपितु 'पानी' के लिए भी पलायन कर रहे हैं। यह विडम्बना ही है कि उत्तराखंड के सैकड़ों गाँव आजादी के इतने दशक बीतने के बाद भी साल के सात-आठ महीने पानी के लिए तरसते हैं।

संजॉय घोष मीडिया अवार्ड 2020’ का परिणाम घोषित

Submitted by HindiWater on Fri, 11/13/2020 - 10:56
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Source
चरखा फीचर्स
संजॉय घोष मीडिया अवार्ड 2020’ का परिणाम घोषित
दिल्ली स्थित एनजीओ ‘चरखा विकास संचार नेटवर्क’ ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2020’ के लिए चयनित प्रतिभागियों के नामों की घोषणा कर दी है। प्रतिभागियों का चयन तीन सदस्यों की जूरी पैनल द्वारा किया गया। जिसकी अध्यक्षता द वायर की सुश्री पैमला फिलीपोज़ ने की। अन्य सदस्यों में अमर उजाला से श्री सुदीप ठाकुर और गाँव कनेक्शन से सुश्री निधि जम्वाल थीं।

जब 1984 को पूर्वी कोसी तटबंध टूटा...

Submitted by HindiWater on Tue, 11/10/2020 - 12:09
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कोसी मित्र
जब 1984 को पूर्वी कोसी तटबंध टूटा...
पूर्वी कोसी तटबंध के 72-78 कि. मी. के बीच कोसी का जलस्तर ख़तरे के निशान को पार कर चुका है। बाँध कभी भी टूट सकता है। नागरिकों को चेताया जाता है कि वे अपने घरों को ख़ाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ...

प्रयास

सूखे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  

Submitted by HindiWater on Fri, 12/25/2020 - 10:11
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सूखे बुंदेलखंड़ में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव  
जखनी गांववासियों की मेहनत का ही नतीजा है कि 2012 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने जिले के 470 गांवों में जखनी माॅडल को अपनाने का आदेश दे दिया। साथ ही नीति आयोग ने जखनी को देश का पहला ‘जल-ग्राम’ घोषित किया है। इसके अलावा जखनी गांव को माॅडल बना देश के 1034 गांवों को जलग्राम बनाने की घोषणा की गई है।

नोटिस बोर्ड

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भविष्य में किस तरह पानी को किया जा सकता है सुरक्षित 

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 14:54
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वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे । इस संबंध में CII वाटर इंस्टीट्यूट द्वारा  03 नवंबर, 2020 को "पानी के सुरक्षित भविष्य के लिए जोखिम से लचीलापन की ओर बढ़ना' पर  एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।

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