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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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Submitted by HindiWater on Wed, 02/03/2021 - 17:29
Source:
द टेलीप्रिंटर
नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़
भारत मे एक जगह ऐसी भी है जिसे देखकर आप भी चौक जायेगें। वह दुनिया के अजूबे में तो नहीं लेकिन उससे कम भी नही है । बात मध्यप्रदेश के देवास जिले की है। जहाँ आज एक रहस्स भरे पहाड़ में कुछ अलग तरह के अद्भुत पत्थर है। जिनकी संख्या लाखों में है । विभिन्न आकर के इन पत्थरों से अलग अलग सुर निकलते। जो वाकई में शानदार है। पत्थरों से जुड़ी ऐसी ही कुछ अद्भुत जानकरी के लिये देखे पूरा वीडियो
Submitted by HindiWater on Fri, 01/29/2021 - 16:21
Source:
Hindi Water Portal
बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल
बिहार में बाढ़ एक सालाना प्राकृतिक घटना है। कुछ दशक से एक भी साल ऐसा नहीं गया होगा जब बिहार ने बाढ़ का सामना ना किया हो। 6 दशकों में बिहार को भारी  नुकसान झेलना पड़ा है।  सन् 1954 का भीषण बाढ़ जिसने उत्तर बिहार का 2.46 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहा डाला और  करीब 7.61 मिलियन आबादी को नुकसान पहुंचाया।    फिर से, सन 1974 में नए और बड़े बाढ़ से राज्य को सामना करना पड़ा। जो की ना केवल उत्तरी भाग बल्कि दक्षिण भाग को भी चपेट में ले लिया। जिसने 16.39 मिलियन लोग प्रभावित हुए।  वर्ष 1987, बीस वे शताब्दी का सबसे भयानक बाढ़ जो पूरे राज्य को बहा ले गयी। और इसमें 1373 लोग मारे गए। वर्ष 2004 और 2007 मे भी बहुत ज़्यादा बाढ़ आपदा हुई। अगस्त 2008, कोसी नदी के भयनक बाढ़ ने राज्य को हिल्ला के रख दिए था। वो बाढ़ जिसने पूरा आधा राज्य ग्रसित हुआ और बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बाढ़ प्रलय माना जाता है।जो नेपाल मे किये गए तटबंध के टूटने के कारण हुआ
Submitted by HindiWater on Mon, 01/25/2021 - 17:00
Source:
इंडिया वाटर पोर्टल
2020: आपदाओं में घिरा,फिर भी उम्मीद से भरा
साल 2020  कई आपदाओं के साथ आया,ना केवल कोविड ,एक ऐसी महामारी जिसने हमारे ग्रह को ही थाम दिया बल्कि और कई  अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी आई।इस वर्ष देश चक्रवात,अत्यधिक वर्षा बाढ़ और टिड्डियों के हमलों से भी जूझा। भारत के कई तट भी इन पांच चक्रवात  अम्फान, निसर्ग, गति, निवार और बूरवी से खासे प्रभावित हुए।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
Source:
विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

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खासम-खास

सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध

Submitted by HindiWater on Tue, 03/23/2021 - 16:43
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
samajik-svikaryata-ki-kasauti-par-bandh
सामाजिक स्वीकार्यता की कसौटी पर बांध
भारतीय समाज लगभग 6000 साल पहले से पानी से दो मोर्चों पर जूझ रहा है। पहला मोर्चा है बाढ़ और दूसरा मोर्चा है पानी की बारहमासी निरापद आपूर्ति। सभी जानते हैं कि, बाढ, अस्थायी आपदा है इसलिए भारतीय समाज ने बसाहटों को, नदियों सुरक्षित दूरी पर बसाया। दूसरे मोर्चे पर सफलता हासिल करने के लिए उन कुदरती लक्षणों को समझने का प्रयास किया जो पानी की सर्वकालिक एवं सर्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करते है। लगता है, यही जद्दोजहद जल संरचनाओं के विकास का आधार बनी होगी।

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नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़

Submitted by HindiWater on Wed, 02/03/2021 - 17:29
narmada-ka-itihas-chhupaye-pahad
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द टेलीप्रिंटर
नर्मदा का इतिहास छुपाए पहाड़
भारत मे एक जगह ऐसी भी है जिसे देखकर आप भी चौक जायेगें। वह दुनिया के अजूबे में तो नहीं लेकिन उससे कम भी नही है । बात मध्यप्रदेश के देवास जिले की है। जहाँ आज एक रहस्स भरे पहाड़ में कुछ अलग तरह के अद्भुत पत्थर है। जिनकी संख्या लाखों में है । विभिन्न आकर के इन पत्थरों से अलग अलग सुर निकलते। जो वाकई में शानदार है। पत्थरों से जुड़ी ऐसी ही कुछ अद्भुत जानकरी के लिये देखे पूरा वीडियो

बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल

Submitted by HindiWater on Fri, 01/29/2021 - 16:21
bihar-men-tatbandh:-badh-rokne-men-safal-ya-vifal
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Hindi Water Portal
बिहार में तटबंध: बाढ़ रोकने में सफल या विफल
बिहार में बाढ़ एक सालाना प्राकृतिक घटना है। कुछ दशक से एक भी साल ऐसा नहीं गया होगा जब बिहार ने बाढ़ का सामना ना किया हो। 6 दशकों में बिहार को भारी  नुकसान झेलना पड़ा है।  सन् 1954 का भीषण बाढ़ जिसने उत्तर बिहार का 2.46 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहा डाला और  करीब 7.61 मिलियन आबादी को नुकसान पहुंचाया।    फिर से, सन 1974 में नए और बड़े बाढ़ से राज्य को सामना करना पड़ा। जो की ना केवल उत्तरी भाग बल्कि दक्षिण भाग को भी चपेट में ले लिया। जिसने 16.39 मिलियन लोग प्रभावित हुए।  वर्ष 1987, बीस वे शताब्दी का सबसे भयानक बाढ़ जो पूरे राज्य को बहा ले गयी। और इसमें 1373 लोग मारे गए। वर्ष 2004 और 2007 मे भी बहुत ज़्यादा बाढ़ आपदा हुई। अगस्त 2008, कोसी नदी के भयनक बाढ़ ने राज्य को हिल्ला के रख दिए था। वो बाढ़ जिसने पूरा आधा राज्य ग्रसित हुआ और बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बाढ़ प्रलय माना जाता है।जो नेपाल मे किये गए तटबंध के टूटने के कारण हुआ

2020: आपदाओं में घिरा,फिर भी उम्मीद से भरा

Submitted by HindiWater on Mon, 01/25/2021 - 17:00
2020:-apadaon-men-dhira,fir-bhi-ummid-sey-bhare
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इंडिया वाटर पोर्टल
2020: आपदाओं में घिरा,फिर भी उम्मीद से भरा
साल 2020  कई आपदाओं के साथ आया,ना केवल कोविड ,एक ऐसी महामारी जिसने हमारे ग्रह को ही थाम दिया बल्कि और कई  अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी आई।इस वर्ष देश चक्रवात,अत्यधिक वर्षा बाढ़ और टिड्डियों के हमलों से भी जूझा। भारत के कई तट भी इन पांच चक्रवात  अम्फान, निसर्ग, गति, निवार और बूरवी से खासे प्रभावित हुए।

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
uttarakhand-jal-sankat-:-chhote-prayas-sey-bada-samadhan-nikalega
Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
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अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

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