नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by HindiWater on Fri, 10/11/2019 - 08:38
जल संरक्षण - आवश्यकता एवं उपाय।
हम सभी जानते हैं कि जल सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। आपने यह भी जानकारी प्राप्त कर ली होगी कि प्रयोग करने योग्य पानी की कमी होती जा रही है। यहाँ पर पानी के संरक्षण के कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय, प्रत्येक व्यक्ति, समुदाय तथा जल संरक्षण में सरकार का योगदान की भूमिका के बारे में जान जाएँगे।

Content

Submitted by HindiWater on Wed, 08/07/2019 - 15:06
Source:
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
environment conservation in vedas
वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी। पर्यावरण का सीधा-सरल अर्थ है प्रकृति का आवरण। कहा गया है कि ‘परितः आवरणं पर्यावरणम्’ प्राणी जगत को चारों ओर से ढकने वाला प्रकृति तत्व, जिनका हम प्रत्यक्षतः एवं अप्रत्यक्षतः, जाने या अनजाने उपभोग करते हैं तथा जिनसे हमारी भौतिक, आत्मिक एवं मानसिक चेतना प्रवाहित एवं प्रभावित होती है, यह पर्यावरण भौतिक, जैविक एवं सांस्कृतिक तीन प्रकार का कहा गया है।
Submitted by HindiWater on Wed, 08/07/2019 - 11:14
Source:
पाञ्चजन्य, 2 जून 2018
water and environment crisis in india

प्रकृति परायण भारतीय समाज ? ।

मानव शरीर पंचतत्व से निर्मित है- पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, तथा वायु। यही तत्व मिलकर प्रकृति एवं पर्यावरण का निर्माण करते हैं। मनुष्य के स्वस्थ एवं दीर्घायु रहने के लिए इन तत्वों में संतुलन होना आवश्यक है। दुर्भाग्य से हमारी भागीदारी प्रवृत्ति ने इस प्राकृतिक सन्तुलन को अस्थिर कर दिया है। संसाधनों का दोहन करते समय हम पूँजी-लाभ में इतना उलझे कि जीवन-चक्र ही असंतुलित हो गया।
Submitted by HindiWater on Tue, 08/06/2019 - 17:11
Source:
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
environment in indian culture
भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन। भारतीय दर्शन पूरी तरह उस जीवन विज्ञान पर आधारित है, जिसमें भौतिक विज्ञान (अपरा विद्या) और अध्यात्म (परा विद्या) एक-दूसरे के साथ संश्लिट हैं। दोनों के मिलन से ही मानव जाति का सम्यक विकास हो सकता है। वैदिक सूत्र बताते हैं कि मानव और ब्रह्माण्ड में एक सावयवी एवं अनिवार्य समानता है, ‘‘यत पिण्डे तत ब्रह्माण्डे।’’ पाश्चात्य दर्शनों में ''फ्रिटजॉफ काप्रा'' ने इसे गहन पारिस्थितिकी का विषय बताते हुए पर्यावरणीय दृष्टिकोण के रूप में विवेचित किया है,  

प्रयास

Submitted by HindiWater on Tue, 10/15/2019 - 11:15
रामवीर तंवर।
गांव से बाहरवी तक की पढ़ाई करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने लिए एक काॅलेज में दाखिला लिया। काॅलेज में पर्यावरण संरक्षण के लिए रामवीर काफी सक्रिय रहे। साथ ही उनके मन में जलाशयों को संरक्षित करने का विचार चलता रहा। बीटेक करने के बाद एक अच्छी नौकरी मिल गई, लेकिन बार बार मन तालाबों के संरक्षण के बारे में ही सोचता रहा।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
Source:
मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन।
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिगत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे।
Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source:
योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -
Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source:
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

Latest

खासम-खास

जल संरक्षण - आवश्यकता एवं उपाय

Submitted by HindiWater on Fri, 10/11/2019 - 08:38
हम सभी जानते हैं कि जल सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। आपने यह भी जानकारी प्राप्त कर ली होगी कि प्रयोग करने योग्य पानी की कमी होती जा रही है। यहाँ पर पानी के संरक्षण के कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय, प्रत्येक व्यक्ति, समुदाय तथा जल संरक्षण में सरकार का योगदान की भूमिका के बारे में जान जाएँगे।

Content

वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी

Submitted by HindiWater on Wed, 08/07/2019 - 15:06
Source
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी।वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी। पर्यावरण का सीधा-सरल अर्थ है प्रकृति का आवरण। कहा गया है कि ‘परितः आवरणं पर्यावरणम्’ प्राणी जगत को चारों ओर से ढकने वाला प्रकृति तत्व, जिनका हम प्रत्यक्षतः एवं अप्रत्यक्षतः, जाने या अनजाने उपभोग करते हैं तथा जिनसे हमारी भौतिक, आत्मिक एवं मानसिक चेतना प्रवाहित एवं प्रभावित होती है, यह पर्यावरण भौतिक, जैविक एवं सांस्कृतिक तीन प्रकार का कहा गया है।

विकास की आड़ में असंतुलित होता पर्यावरण

Submitted by HindiWater on Wed, 08/07/2019 - 11:14
Source
पाञ्चजन्य, 2 जून 2018

 प्रकृति परायण भारतीय समाज ? ।प्रकृति परायण भारतीय समाज ? ।

मानव शरीर पंचतत्व से निर्मित है- पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, तथा वायु। यही तत्व मिलकर प्रकृति एवं पर्यावरण का निर्माण करते हैं। मनुष्य के स्वस्थ एवं दीर्घायु रहने के लिए इन तत्वों में संतुलन होना आवश्यक है। दुर्भाग्य से हमारी भागीदारी प्रवृत्ति ने इस प्राकृतिक सन्तुलन को अस्थिर कर दिया है। संसाधनों का दोहन करते समय हम पूँजी-लाभ में इतना उलझे कि जीवन-चक्र ही असंतुलित हो गया।

भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन

Submitted by HindiWater on Tue, 08/06/2019 - 17:11
Source
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन।भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन। भारतीय दर्शन पूरी तरह उस जीवन विज्ञान पर आधारित है, जिसमें भौतिक विज्ञान (अपरा विद्या) और अध्यात्म (परा विद्या) एक-दूसरे के साथ संश्लिट हैं। दोनों के मिलन से ही मानव जाति का सम्यक विकास हो सकता है। वैदिक सूत्र बताते हैं कि मानव और ब्रह्माण्ड में एक सावयवी एवं अनिवार्य समानता है, ‘‘यत पिण्डे तत ब्रह्माण्डे।’’ पाश्चात्य दर्शनों में ''फ्रिटजॉफ काप्रा'' ने इसे गहन पारिस्थितिकी का विषय बताते हुए पर्यावरणीय दृष्टिकोण के रूप में विवेचित किया है,  

प्रयास

तालाबों को संरक्षित करने के लिए इंजीनियर ने छोड़ दी नौकरी

Submitted by HindiWater on Tue, 10/15/2019 - 11:15
गांव से बाहरवी तक की पढ़ाई करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने लिए एक काॅलेज में दाखिला लिया। काॅलेज में पर्यावरण संरक्षण के लिए रामवीर काफी सक्रिय रहे। साथ ही उनके मन में जलाशयों को संरक्षित करने का विचार चलता रहा। बीटेक करने के बाद एक अच्छी नौकरी मिल गई, लेकिन बार बार मन तालाबों के संरक्षण के बारे में ही सोचता रहा।

नोटिस बोर्ड

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिगत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source
योजना, अगस्त 2019
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

Upcoming Event

Popular Articles