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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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Submitted by bipincc on Thu, 08/06/2009 - 11:30
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हर साल की तरह इस बार भी बिहार के कुछ इलाके में बाढ़ की विपदा आई हुई है। लेकिन इस बार बागमती और लखनदेई नदियों के तटबंध टूटने से बाढ़ आई है। बागमती नदी में सीतामढ़ी जिले के रूनीसैदपपुर ब्लाॅक के तिलक ताजपुर के पास 200 मीटर तटबंध टूटा है, जबकि बागमती की ही सहायक नदी लखनदेई में दो जगह दरार आई है, जिससे मुजफरपुर जिले के कई गांव प्रभावित हुए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस साल अब तक 75 गांवों के 3 लाख लोगों के घर बार डूब चुके हैं।

Submitted by admin on Sat, 08/01/2009 - 11:37
Source:
jansamachar.net
बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों ने आर्थिक तंगी और सूदखोरों के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। आशंका है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान आत्महत्या का भयावह रास्ता एक बार फिर अख्तियार कर सकते हैं। बांदा, 29 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड का इलाका एक बार फिर सूखे की काली छाया की चपेट में है। आशंका है कि बदहाल किसानों की आत्महत्या का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। राज्य सरकार ने अब तक बांदा, महोबा, जलौन आदि जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।

बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों
Submitted by admin on Tue, 07/28/2009 - 18:55
Source:
सूर्यकांत बाली
वैदिक कवि इतना अभिभूत है कि वह उसे नदीतमा कहकर ही नहीं रूक जाता, उसे माताओं में सबसे श्रेष्ठ और देवियों में सबसे बड़ी देवी कह उठता है-अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वतिहमारे देश में इतिहास का जितना संबंध उपलब्ध तथ्यों से है, उसका उतना ही गहरा संबंध उपलब्ध स्मृतियों से भी है। और अगर हमारी कोई स्मृति हमारे अवचेतन में, हमारे

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
Source:
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Source:
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

Latest

खासम-खास

बावडी: कुछ अनछुए पहलू

Submitted by HindiWater on Thu, 12/31/2020 - 13:34
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bavdi:-kuch-anachue-pahloo
गोंडकालीन सगड़ा बावडी, जबलपुर, मध्यप्रदेश
सदियों से बावडी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है। अलग-अलग इलाकों में बावडियों को अलग-अलग नामों यथा सीढ़ीदार कुआ या वाउली या बाव इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी भाषा में उसे स्टेप-वैल कहा जाता है। इस संरचना में पानी का स्रोत भूजल होता है। भारत में इस संरचना का विकास, सबसे पहले, देश के पानी की कमी वाले पश्चिमी हिस्से में हुआ। वहाँ यह अस्तित्व में आई और समय के साथ फली-फूली। दक्षिण भारत में भी उसका विस्तार हुआ। देश के उन हिस्सों में वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों का हिस्सा बनी। सम्पन्न लोगों के लिए सामाजिक दायित्व बनी।

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बाढ़ तो फिर भी आएगी

Submitted by bipincc on Thu, 08/06/2009 - 11:30
Author
बिपिन चन्द्र चतुर्वेदी


हर साल की तरह इस बार भी बिहार के कुछ इलाके में बाढ़ की विपदा आई हुई है। लेकिन इस बार बागमती और लखनदेई नदियों के तटबंध टूटने से बाढ़ आई है। बागमती नदी में सीतामढ़ी जिले के रूनीसैदपपुर ब्लाॅक के तिलक ताजपुर के पास 200 मीटर तटबंध टूटा है, जबकि बागमती की ही सहायक नदी लखनदेई में दो जगह दरार आई है, जिससे मुजफरपुर जिले के कई गांव प्रभावित हुए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस साल अब तक 75 गांवों के 3 लाख लोगों के घर बार डूब चुके हैं।

बुंदेलखंड फिर सूखा

Submitted by admin on Sat, 08/01/2009 - 11:37
Source
jansamachar.net
बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों ने आर्थिक तंगी और सूदखोरों के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। आशंका है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान आत्महत्या का भयावह रास्ता एक बार फिर अख्तियार कर सकते हैं। बांदा, 29 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड का इलाका एक बार फिर सूखे की काली छाया की चपेट में है। आशंका है कि बदहाल किसानों की आत्महत्या का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। राज्य सरकार ने अब तक बांदा, महोबा, जलौन आदि जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।

बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों

सरस्वती कहाँ है

Submitted by admin on Tue, 07/28/2009 - 18:55
Source
सूर्यकांत बाली
वैदिक कवि इतना अभिभूत है कि वह उसे नदीतमा कहकर ही नहीं रूक जाता, उसे माताओं में सबसे श्रेष्ठ और देवियों में सबसे बड़ी देवी कह उठता है-अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वतिहमारे देश में इतिहास का जितना संबंध उपलब्ध तथ्यों से है, उसका उतना ही गहरा संबंध उपलब्ध स्मृतियों से भी है। और अगर हमारी कोई स्मृति हमारे अवचेतन में, हमारे

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
uttarakhand-jal-sankat-:-chhote-prayas-sey-bada-samadhan-nikalega
Source
चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

हिंदी पत्रकारों के लिए सीएसई-एएईटीआई की ओर से ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स

Submitted by UrbanWater on Mon, 11/16/2020 - 13:01
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
hindi-patrakaron-ke-liye-cse-aaeti-online-training-course
अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) का कैम्पस

डाउन टू अर्थ  और अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) दोनों के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। पत्रकारों की स्टोरी को विश्वसनीय बनाने में आंकड़ों और डेटा की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डेटा की मदद से हम संवाद को तथ्यात्मक बना सकते हैं।

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 10/27/2020 - 16:26
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Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

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