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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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Submitted by Shivendra on Wed, 08/07/2019 - 15:06
Source:
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
environment conservation in vedas
वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी। पर्यावरण का सीधा-सरल अर्थ है प्रकृति का आवरण। कहा गया है कि ‘परितः आवरणं पर्यावरणम्’ प्राणी जगत को चारों ओर से ढकने वाला प्रकृति तत्व, जिनका हम प्रत्यक्षतः एवं अप्रत्यक्षतः, जाने या अनजाने उपभोग करते हैं तथा जिनसे हमारी भौतिक, आत्मिक एवं मानसिक चेतना प्रवाहित एवं प्रभावित होती है, यह पर्यावरण भौतिक, जैविक एवं सांस्कृतिक तीन प्रकार का कहा गया है।
Submitted by Shivendra on Wed, 08/07/2019 - 11:14
Source:
पाञ्चजन्य, 2 जून 2018
water and environment crisis in india

प्रकृति परायण भारतीय समाज ? ।

मानव शरीर पंचतत्व से निर्मित है- पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, तथा वायु। यही तत्व मिलकर प्रकृति एवं पर्यावरण का निर्माण करते हैं। मनुष्य के स्वस्थ एवं दीर्घायु रहने के लिए इन तत्वों में संतुलन होना आवश्यक है। दुर्भाग्य से हमारी भागीदारी प्रवृत्ति ने इस प्राकृतिक सन्तुलन को अस्थिर कर दिया है। संसाधनों का दोहन करते समय हम पूँजी-लाभ में इतना उलझे कि जीवन-चक्र ही असंतुलित हो गया।
Submitted by Shivendra on Tue, 08/06/2019 - 17:11
Source:
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
environment in indian culture
भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन। भारतीय दर्शन पूरी तरह उस जीवन विज्ञान पर आधारित है, जिसमें भौतिक विज्ञान (अपरा विद्या) और अध्यात्म (परा विद्या) एक-दूसरे के साथ संश्लिट हैं। दोनों के मिलन से ही मानव जाति का सम्यक विकास हो सकता है। वैदिक सूत्र बताते हैं कि मानव और ब्रह्माण्ड में एक सावयवी एवं अनिवार्य समानता है, ‘‘यत पिण्डे तत ब्रह्माण्डे।’’ पाश्चात्य दर्शनों में ''फ्रिटजॉफ काप्रा'' ने इसे गहन पारिस्थितिकी का विषय बताते हुए पर्यावरणीय दृष्टिकोण के रूप में विवेचित किया है,  

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।
Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
Source:
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
Source:
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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खासम-खास

केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण  : कुछ तथ्य, कुछ जानकारियां

Submitted by Editorial Team on Fri, 07/08/2022 - 17:20
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
kendriya-bhoomi-jal-pradhikaran-:-kuchh-tathy,-kuchh-jankariyan
केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण
भूजल का दोहन, भूस्वामी की जमीन की सीमा तक सीमित नहीं होता। वह अनेक पैरामीटर पर निर्भर होता है। उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिकों को अधिनियम को मानवीय और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान करने के लिए काफी कुछ करना बाकी है। सबसे अधिक आवश्यक है सामाजिक स्वीकार्यता। यदि अधिनियम से सामाजिक स्वीकार्यता अनुपस्थित है तो अधिनियमों को धरती पर उतारना और समस्या को हल करना कठिन हो सकता है। भूमि जल प्राधिकरण के सामने यही असली चुनौती है।

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वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी

Submitted by Shivendra on Wed, 08/07/2019 - 15:06
Source
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
environment conservation in vedas
वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी।वेदों में पर्यावरण चिंतन, चिंता, चेतावनी। पर्यावरण का सीधा-सरल अर्थ है प्रकृति का आवरण। कहा गया है कि ‘परितः आवरणं पर्यावरणम्’ प्राणी जगत को चारों ओर से ढकने वाला प्रकृति तत्व, जिनका हम प्रत्यक्षतः एवं अप्रत्यक्षतः, जाने या अनजाने उपभोग करते हैं तथा जिनसे हमारी भौतिक, आत्मिक एवं मानसिक चेतना प्रवाहित एवं प्रभावित होती है, यह पर्यावरण भौतिक, जैविक एवं सांस्कृतिक तीन प्रकार का कहा गया है।

विकास की आड़ में असंतुलित होता पर्यावरण

Submitted by Shivendra on Wed, 08/07/2019 - 11:14
Source
पाञ्चजन्य, 2 जून 2018
water and environment crisis in india

 प्रकृति परायण भारतीय समाज ? ।प्रकृति परायण भारतीय समाज ? ।

मानव शरीर पंचतत्व से निर्मित है- पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, तथा वायु। यही तत्व मिलकर प्रकृति एवं पर्यावरण का निर्माण करते हैं। मनुष्य के स्वस्थ एवं दीर्घायु रहने के लिए इन तत्वों में संतुलन होना आवश्यक है। दुर्भाग्य से हमारी भागीदारी प्रवृत्ति ने इस प्राकृतिक सन्तुलन को अस्थिर कर दिया है। संसाधनों का दोहन करते समय हम पूँजी-लाभ में इतना उलझे कि जीवन-चक्र ही असंतुलित हो गया।

भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन

Submitted by Shivendra on Tue, 08/06/2019 - 17:11
Source
पाञ्चजन्य, 1 जून 2019
environment in indian culture
भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन।भारतीय संस्कृति में पर्यावरणीय और जल चिंतन। भारतीय दर्शन पूरी तरह उस जीवन विज्ञान पर आधारित है, जिसमें भौतिक विज्ञान (अपरा विद्या) और अध्यात्म (परा विद्या) एक-दूसरे के साथ संश्लिट हैं। दोनों के मिलन से ही मानव जाति का सम्यक विकास हो सकता है। वैदिक सूत्र बताते हैं कि मानव और ब्रह्माण्ड में एक सावयवी एवं अनिवार्य समानता है, ‘‘यत पिण्डे तत ब्रह्माण्डे।’’ पाश्चात्य दर्शनों में ''फ्रिटजॉफ काप्रा'' ने इसे गहन पारिस्थितिकी का विषय बताते हुए पर्यावरणीय दृष्टिकोण के रूप में विवेचित किया है,  

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
udayapur-ke-is-gaon-ko-weightland-ghoshit-kiya-jana-tay
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
28-july-ko-ayojit-hone-vale-jal-shiksha-vyakhyan-shrinkhala-par-bhag-lene-ke-liye-panjikaran-karayen
Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
bhoojal-sanrakshan-ke-kshetra-men-karya-karne-valo-ke-liye-up-sarkar-ne-manga-avedan
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
swasth-jeevan-ke-liye-gharelu-jal-upchar-or-swachhta-vyavahar-mein-parivartan-par-tin-divasiy-prashikshan-karyashala
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

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