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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

झीलों और तालाबों के संरक्षण के लिए छोड़ी गूगल की नौकरी

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 19:47
अरुण कृष्णमूर्ति।अरुण कृष्णमूर्ति। नौकरी छोड़ने के बाद अरुण ने अपना जीवन पर्यावरण के प्रति ही समर्पित कर दिया और झीलों को साफ करने के उद्देश्य के लिए वर्ष 2007 में एनवायरमेंट फाउंडेशन इंडिया (ईएफआई) की स्थापना की। अपने इस अभियान की शुरुआत हैदराबाद के गुरुनधान झील को साफ करके की। अरुण ने जल संरक्षण में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों के लिए विभिन्न स्कूलों में जाकर विभिन्न जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से जल संरक्षण की जानकारी दी।

अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण का प्रभाव

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 11:09
Source
दैनिक नवज्योति, 25 जून 2019
अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण का प्रभाव। अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण का प्रभाव। विश्व के 20 सबसे वायु प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। इनमें कानपुर विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। हमारी इस दुरूह परिस्थिति के पीछे कारण यह है कि वायु प्रदूषण से भारी हानि आम जनता को होती है, जबकि वायु प्रदूषण फैलाने से न्यून लाभ चुनिन्दा व्यवसायियों को होता है। अतः व्यवसायी अपने न्यून लाभ के लिए वायु प्रदूषण का विस्तार करते हैं और भारी खामियाजा आम जनता भुगतती है। व्यवसायियों पर नकेल कसने में सरकार फेल है।

केरल का पलायन सुंदरवन के लोगों के लिए अवसर क्यों है ?

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 10:33
Author
उमेश कुमार राय

मौसनी आइलैंड।मौसनी आइलैंड।

सुंदरवन के जिन टापुओं पर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है, वहां दक्षिण भारत का बेहद छोटा सूबा लोगों की जुबान पर चढ़ा रहता है। संयोग से यह सूबा भी सुंदरवन के टापुओं की तरह समुद्र से सटा हुआ है और इस सूबे का आधा हिस्सा समुद्र की तरफ खुलता है। इस सूबे को खुदा का अपना मुल्क भी कहा जाता है। ये सूबा है 3886 वर्ग किलोमीटर में फैला केरल। सुंदरवन से केरल की दूरी करीब 1846 किलोमीटर है, जहां पहुंचने के लिए तीन रातें और तीन दिन सफर में गुजारना पड़ता है।

प्रयास

कार मैकेनिक से बना पर्यावरण प्रेमी, खेत में 300 से ज्यादा मोरों का बसेरा

Submitted by HindiWater on Tue, 08/20/2019 - 15:54
हिम्मताराम भांबू।हिम्मताराम भांबू। हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हैं। नागौर जिला पानी की उपलब्धता के हिसाब से डार्क जोन में होने से यहां के लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। हिम्मताराम भांबू का बचपन इन्हीं परेशानियों से जूझते और कठिनाईयों से निबटने के उपायों को देखते हुए ही बीता था। खेती-किसानी के लिए हिम्मताराम को गांव में कक्षा 6 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पैसों की तंगी के कारण बचपन से ही मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को पुर्जे खोलने और मरम्मत करने में सहायता करने लगे।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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झीलों और तालाबों के संरक्षण के लिए छोड़ी गूगल की नौकरी

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 19:47
अरुण कृष्णमूर्ति।अरुण कृष्णमूर्ति। नौकरी छोड़ने के बाद अरुण ने अपना जीवन पर्यावरण के प्रति ही समर्पित कर दिया और झीलों को साफ करने के उद्देश्य के लिए वर्ष 2007 में एनवायरमेंट फाउंडेशन इंडिया (ईएफआई) की स्थापना की। अपने इस अभियान की शुरुआत हैदराबाद के गुरुनधान झील को साफ करके की। अरुण ने जल संरक्षण में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों के लिए विभिन्न स्कूलों में जाकर विभिन्न जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से जल संरक्षण की जानकारी दी।

अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण का प्रभाव

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 11:09
Source
दैनिक नवज्योति, 25 जून 2019
अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण का प्रभाव। अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण का प्रभाव। विश्व के 20 सबसे वायु प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। इनमें कानपुर विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। हमारी इस दुरूह परिस्थिति के पीछे कारण यह है कि वायु प्रदूषण से भारी हानि आम जनता को होती है, जबकि वायु प्रदूषण फैलाने से न्यून लाभ चुनिन्दा व्यवसायियों को होता है। अतः व्यवसायी अपने न्यून लाभ के लिए वायु प्रदूषण का विस्तार करते हैं और भारी खामियाजा आम जनता भुगतती है। व्यवसायियों पर नकेल कसने में सरकार फेल है।

केरल का पलायन सुंदरवन के लोगों के लिए अवसर क्यों है ?

Submitted by HindiWater on Wed, 07/24/2019 - 10:33
Author
उमेश कुमार राय

मौसनी आइलैंड।मौसनी आइलैंड।

सुंदरवन के जिन टापुओं पर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है, वहां दक्षिण भारत का बेहद छोटा सूबा लोगों की जुबान पर चढ़ा रहता है। संयोग से यह सूबा भी सुंदरवन के टापुओं की तरह समुद्र से सटा हुआ है और इस सूबे का आधा हिस्सा समुद्र की तरफ खुलता है। इस सूबे को खुदा का अपना मुल्क भी कहा जाता है। ये सूबा है 3886 वर्ग किलोमीटर में फैला केरल। सुंदरवन से केरल की दूरी करीब 1846 किलोमीटर है, जहां पहुंचने के लिए तीन रातें और तीन दिन सफर में गुजारना पड़ता है।

प्रयास

कार मैकेनिक से बना पर्यावरण प्रेमी, खेत में 300 से ज्यादा मोरों का बसेरा

Submitted by HindiWater on Tue, 08/20/2019 - 15:54
हिम्मताराम भांबू।हिम्मताराम भांबू। हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हैं। नागौर जिला पानी की उपलब्धता के हिसाब से डार्क जोन में होने से यहां के लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। हिम्मताराम भांबू का बचपन इन्हीं परेशानियों से जूझते और कठिनाईयों से निबटने के उपायों को देखते हुए ही बीता था। खेती-किसानी के लिए हिम्मताराम को गांव में कक्षा 6 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पैसों की तंगी के कारण बचपन से ही मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को पुर्जे खोलने और मरम्मत करने में सहायता करने लगे।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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