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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Wed, 09/02/2020 - 13:49
Anupam_Mishra
अपनी पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” में श्री अनुपम जी ने समूचे भारत के तालाबों, जल-संचयन पद्धतियों, जल-प्रबन्धन, झीलों तथा पानी की अनेक भव्य परंपराओं की समझ, दर्शन और शोध को लिपिबद्ध किया है। भारत की यह पारम्परिक जल संरचनाएं, आज भी हजारों गाँवों और कस्बों के लिये जीवनरेखा के समान हैं। इसी पुस्तक को कागजों से निकालकर संगीतमय ध्वनि में पिरोने का एक प्रयास कर रहे हैं डॉ. रमाकांत राय।

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Submitted by bipincc on Thu, 08/06/2009 - 11:30
Source:


हर साल की तरह इस बार भी बिहार के कुछ इलाके में बाढ़ की विपदा आई हुई है। लेकिन इस बार बागमती और लखनदेई नदियों के तटबंध टूटने से बाढ़ आई है। बागमती नदी में सीतामढ़ी जिले के रूनीसैदपपुर ब्लाॅक के तिलक ताजपुर के पास 200 मीटर तटबंध टूटा है, जबकि बागमती की ही सहायक नदी लखनदेई में दो जगह दरार आई है, जिससे मुजफरपुर जिले के कई गांव प्रभावित हुए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस साल अब तक 75 गांवों के 3 लाख लोगों के घर बार डूब चुके हैं।

Submitted by admin on Sat, 08/01/2009 - 11:37
Source:
jansamachar.net
बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों ने आर्थिक तंगी और सूदखोरों के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। आशंका है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान आत्महत्या का भयावह रास्ता एक बार फिर अख्तियार कर सकते हैं। बांदा, 29 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड का इलाका एक बार फिर सूखे की काली छाया की चपेट में है। आशंका है कि बदहाल किसानों की आत्महत्या का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। राज्य सरकार ने अब तक बांदा, महोबा, जलौन आदि जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।

बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों

प्रयास

Submitted by HindiWater on Sun, 09/06/2020 - 20:27
हिमालय को नया जीवन दे रहे प्रदीप सांगवान
पहाड़ों को बचाने के लिए एक टीम खड़ी करने के लिए अपने जैसे विचारधारा के लोगों की तलाश करने लगे, ताकि वे लोग भी उनके इस कार्य में सहयोग कर सकें। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2016 ‘‘द हीलिंग हिमालय फाउंडेशन’’ नाम से एक संस्था की शुरुआत की। अपने संघर्षपूर्ण जीवन में प्रदीप अभी तक पहाड़ों से 7 लाख किलोग्राम से ज्यादा गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा एकत्रित कर चुके हैं।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Tue, 09/15/2020 - 16:26
Source:
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 
Submitted by HindiWater on Fri, 09/04/2020 - 17:30
Source:
water conflict forum
Water Conflicts
भारत में जल संघर्ष पर नीति वार्ता के लिए फोरम (वाटर कनफ्लिक्ट फोरम) नियमित अंतराल पर 10 सितंबर से 8 अक्टूबर, 2020 तक वेबिनार की एक श्रृंखला का आयोजन कर रहा है, इस आयोजन के दौरान उन व्यक्तियों से बात करने का मौक़ा मिलेगा जो बाढ़ से जुड़े हुए हैं, जिन्हे बाढ़ का अनुभव है, जिन्होंने बाढ़ से निपटने के लिए बेहतर प्रबंधन की वकालत की है
Submitted by HindiWater on Thu, 09/03/2020 - 17:46
Source:
लोगो - वाटर डाइजेस्ट
वर्षा जल संचयन और प्रबंधन पर "वाटर डाइजेस्ट"  दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित कर रहा है। यह कार्यक्रम 10 और 11 सितंबर को होगा। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल वाटर मिशन डिपार्टमेंट के कैंपेन "कैच द रेन" को सपोर्ट करने के लिए वाटर डाइजेस्ट की पहल का मकसद प्रतिभागियों के बीच चर्चा, जागरूकता और सूचना साझा करने को बढ़ावा देना है।

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खासम-खास

आज भी खरे हैं तालाब- पाल के किनारे लिखा इतिहास का संगीतमय वाचन

Submitted by UrbanWater on Wed, 09/02/2020 - 13:49
Author
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)
aaj-bhi-khare-hain-talab-pal-ke-kinare-likha-itihas-ka-sangitamay-vachan
Source
रमाकांत राय
Anupam_Mishra
अपनी पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” में श्री अनुपम जी ने समूचे भारत के तालाबों, जल-संचयन पद्धतियों, जल-प्रबन्धन, झीलों तथा पानी की अनेक भव्य परंपराओं की समझ, दर्शन और शोध को लिपिबद्ध किया है। भारत की यह पारम्परिक जल संरचनाएं, आज भी हजारों गाँवों और कस्बों के लिये जीवनरेखा के समान हैं। इसी पुस्तक को कागजों से निकालकर संगीतमय ध्वनि में पिरोने का एक प्रयास कर रहे हैं डॉ. रमाकांत राय।

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बाढ़ तो फिर भी आएगी

Submitted by bipincc on Thu, 08/06/2009 - 11:30
Author
बिपिन चन्द्र चतुर्वेदी


हर साल की तरह इस बार भी बिहार के कुछ इलाके में बाढ़ की विपदा आई हुई है। लेकिन इस बार बागमती और लखनदेई नदियों के तटबंध टूटने से बाढ़ आई है। बागमती नदी में सीतामढ़ी जिले के रूनीसैदपपुर ब्लाॅक के तिलक ताजपुर के पास 200 मीटर तटबंध टूटा है, जबकि बागमती की ही सहायक नदी लखनदेई में दो जगह दरार आई है, जिससे मुजफरपुर जिले के कई गांव प्रभावित हुए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस साल अब तक 75 गांवों के 3 लाख लोगों के घर बार डूब चुके हैं।

बुंदेलखंड फिर सूखा

Submitted by admin on Sat, 08/01/2009 - 11:37
Source
jansamachar.net
बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों ने आर्थिक तंगी और सूदखोरों के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। आशंका है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान आत्महत्या का भयावह रास्ता एक बार फिर अख्तियार कर सकते हैं। बांदा, 29 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड का इलाका एक बार फिर सूखे की काली छाया की चपेट में है। आशंका है कि बदहाल किसानों की आत्महत्या का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। राज्य सरकार ने अब तक बांदा, महोबा, जलौन आदि जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।

बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पिछले साल समूचे बुंदेलखंड के तकरीबन 400 बदहाल किसानों

प्रयास

हिमालय को नया जीवन दे रहे प्रदीप सांगवान

Submitted by HindiWater on Sun, 09/06/2020 - 20:27
pradeep-sangwan-healing-himalayas
हिमालय को नया जीवन दे रहे प्रदीप सांगवान
पहाड़ों को बचाने के लिए एक टीम खड़ी करने के लिए अपने जैसे विचारधारा के लोगों की तलाश करने लगे, ताकि वे लोग भी उनके इस कार्य में सहयोग कर सकें। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2016 ‘‘द हीलिंग हिमालय फाउंडेशन’’ नाम से एक संस्था की शुरुआत की। अपने संघर्षपूर्ण जीवन में प्रदीप अभी तक पहाड़ों से 7 लाख किलोग्राम से ज्यादा गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा एकत्रित कर चुके हैं।

नोटिस बोर्ड

एक्वा फाउंडेशन की XIV वर्ल्ड एक्वा कांग्रेस

Submitted by HindiWater on Tue, 09/15/2020 - 16:26
ekva-foundation-key-XIV-world-ekva-kangres
Source
Aqua Foundation
एक्वा फाउंडेशन
सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन प्रौद्योगिकियों और अत्याधुनिक अनुसंधान में नवीनतम रुझानों के बारे में जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। आपसे निवेदन है कि अपनी संस्था से अधिक से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन करे (online Register as delegate) कार्यक्रम का ब्रोशर यहां डाउनलोड करें.  अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखें  World Aqua Congress.  तारीख : अक्टूबर 29- 30, 2020 समयः प्रातः 9:00 बजे से सांय 6ः00 बजे 

भारत में बाढ़ के साथ महत्वपूर्ण जुड़ाव पर वेबिनार श्रृंखला

Submitted by HindiWater on Fri, 09/04/2020 - 17:30
bharath-mein-badha-kay-saath-mahatvapoorn-judav-par-vebinar-shrrinkhala
Source
water conflict forum
Water Conflicts
भारत में जल संघर्ष पर नीति वार्ता के लिए फोरम (वाटर कनफ्लिक्ट फोरम) नियमित अंतराल पर 10 सितंबर से 8 अक्टूबर, 2020 तक वेबिनार की एक श्रृंखला का आयोजन कर रहा है, इस आयोजन के दौरान उन व्यक्तियों से बात करने का मौक़ा मिलेगा जो बाढ़ से जुड़े हुए हैं, जिन्हे बाढ़ का अनुभव है, जिन्होंने बाढ़ से निपटने के लिए बेहतर प्रबंधन की वकालत की है

वेबिनार- वर्षा जल संचयन और प्रबंधन पर ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम 

Submitted by HindiWater on Thu, 09/03/2020 - 17:46
WEBINAR---varsha-jal-sanchayan-aur-prabandhan-par-online-training-program
लोगो - वाटर डाइजेस्ट
वर्षा जल संचयन और प्रबंधन पर "वाटर डाइजेस्ट"  दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित कर रहा है। यह कार्यक्रम 10 और 11 सितंबर को होगा। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल वाटर मिशन डिपार्टमेंट के कैंपेन "कैच द रेन" को सपोर्ट करने के लिए वाटर डाइजेस्ट की पहल का मकसद प्रतिभागियों के बीच चर्चा, जागरूकता और सूचना साझा करने को बढ़ावा देना है।

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